Tue, 05 May 2026
Logo

ब्रेकिंग

ममता बनर्जी का 'काला जादू' फेल, पीएम मोदी का मैजिक चला, जानिए बंगाल जीत के लिए बीजेपी ने क्या-क्या किया

बंगाल को बीजेपी चाहिए थी, बीजेपी मिल गई, रिजल्ट के बाद अज्ञातवास में गईं महुआ मोइत्रा का पहला बयान

क्या ममता की गलती ने चुनाव को हिंदू-मुसलमान कर दिया! बाबरी मॉडल राजनीति भी ध्वस्त, बीजेपी ने असंभव को संभव बनाया...

बालेन शाह का 'राष्ट्रवादी कार्ड', लिपुलेख विवाद को फिर हवा देकर क्या जताना चाहता है नेपाल?

'काबा नहीं बनने दूंगा,' सीएम योगी आदित्‍यनाथ के 5 भाषण, जो बने पश्चिम बंगाल चुनाव में BJP के लिए टर्निंग पॉइंट

NEET के लिए 80 KM बाइक चलाकर पहुंचे चाचा-भतीजी, 3 मिनट लेट हो गए, फरिश्ता बन आए पुलिसवाले

पश्चिम बंगाल चुनाव में वोट शेयर में बड़ा उलटफेर, कहां BJP से कमजोर पड़ गईं ममता बनर्जी...

अंकों के दंश तले जीवन-बोध से रिक्त होती पीढ़ी : शिक्षा, संवेदना, सभ्यता और समकालीन संकट

प्राचीन प्रकाश, आधुनिक आवश्यकता और मनुष्य होने की शाश्वत चेतना

अंक नहीं, जीवन का सार: शिक्षा के उद्देश्य पर पुनर्विचार, लेखक : डॉ. भूपेन्द्र धर दीवान

सूचना

वेस्ट बंगाल :- कोलकत्ता न्यूज : क्या ममता की गलती ने चुनाव को हिंदू-मुसलमान कर दिया! बाबरी मॉडल राजनीति भी ध्वस्त, बीजेपी ने असंभव को संभव बनाया...

Abhyuday Bharat News / Tue, May 5, 2026 / Post views : 1

Share:

पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने अपने तीसरे ही एटेम्पट में बंगाल कम्पीट कर लिया। बीजेपी को बंगाल में 2016 में 3 सीट, 2021 में 77 सीट और 2026 में पूर्ण बहुमत मिल गया। बीजेपी के लिए पश्चिम बंगाल जीतना बिल्कुल भी आसान नहीं था।

Amit Shah in West Bengal Election

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने इतिहास रच दिया। उसने तीसरे एटेम्पट में पश्चिम बंगाल कम्पीट कर लिया। 2016 में 3 सीट, 2021 में 77 सीट और 2026 में पूर्ण बहुमत। बेहद कठिन परीक्षा थी। पास होंगे कि नहीं, धुकधुकी लगी हुई थी। लेकिन रिजल्ट निकला तो रिकॉर्ड टूट गया। ये कोई आसान काम नहीं था। इस कामयाबी के लिए दिन रात मेहनत करनी पड़ी। बंगाल के एक-एक चैप्टर में जो मुश्किल सवाल थे उसे हल करने के लिए बीजेपी पिछले दो साल से पसीना बहा रही थी। ममता बनर्जी SIR के विवाद में उलझी रहीं और उन्होंने बीजेपी के ‘ग्राउंड वर्क’ पर ध्यान नहीं दिया।

क्या बंगाल चुनाव में हिंदू-मुसलमान हो गया ?

नतीजों के रुझानों के बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा, बंगाल में हिंदू- मुसलमान हो गया। बंगाल में फिर बाबरी मस्जिद बनाने की चर्चा ने चुनाव के नैरेटिव को बदल दिया। ममता बनर्जी पर पहले से मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लग रहे थे। इससे हिंदू मतों का ध्रुवीकरण बीजेपी की तरफ हो गया। इसके पहले पश्चिम बंगाल में तय पैटर्न पर वोटिंग होती थी। ममता बनर्जी यह मान कर चलती थीं कि 30 फीसदी वोट (मुस्लिम मत) तो उनके सुनिश्चित हैं। अगर हिंदू मतों को विभाजित कर देंगी तो उनकी जीत तय है। हिंदू मतों में विभाजन के लिए उन्होंने भद्रलोक को अपने पाले में कर लिया। भद्रलोक खुद पढ़ा-लिखा और धर्मनिरपेक्ष मान कर ममता बनर्जी के साथ हो गया। इससे तृणमूल कांग्रेस लगातार तीन चुनाव जीत गयी।

कैसे हुआ भद्रलोक का मोहभंग ?

लेकिन भद्रलोक का मोह भंग तब हुआ जब तृणमूल की तथाकथित गुंडा वाहिनी ने अराजकता और अत्याचार शुरू कर दिया। आरजी कार मेडिकल कॉलेज की छात्रा की रेप के बाद हत्या की गयी थी। इस घटना ने पश्चिम बंगाल को हिला दिया था। लेकिन ममता सरकार का जो रवैया रहा उससे आम लोगों को बहुत झटका लगा। आरोप लगा कि महिला हो कर भी ममता बनर्जी ने एक पीड़ित महिला को न्याय नहीं दिलाया। उन पर आरोपियों को बचाने के आरोप लगे। इन बातों से पढ़ा लिखा- भद्रलोक अपनी प्रतिष्ठा को लेकर चिंतित हो गया। वे बीजेपी के वोटर नहीं थे, फिर भी कमल की तरफ देखने लगे। बीजेपी ने रेप पीड़िता की मां को पनिहाटी से उम्मीदवार बना कर महिला सुरक्षा को बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया।

अमित शाह 15 दिन तक जमे रहे, रात दो बजे तक काम किया

अमित शाह की कुशल रणनीतिऔर नरेन्द्र मोदी के नाम ने पश्चिम बंगाल के चुनाव को पूरी तरह पलट दिया। पश्चिम बंगाल जीतने के लिए अमित शाह ने जो मेहनत की वह चर्चा का विषय है। वे 15 दिनों तक पश्चिम बंगाल में जमे रहे। रात के 1-2 बजे तक काम करते रहे। एक-एक सीट के लिए दिन रात गुणा-भाग करते रहे। उन्होंने कुल 50 चुनावी कार्यक्रम किये। इस मेहनत ने बीजेपी को अपनी कमियों को सुधारने का मौका मिला। कार्यकर्ताओं में एक नया जोश पैदा हुआ। इस जीत का अधिकतम श्रेय अमित शाह को जाता है। यह चुनाव केवल मोदी के नाम पर नहीं जीता जा सकता था। जमीन पर कम करना बहुत जरूरी थी। तृणमूल की तथाकथित गुंडा वाहिनी से निपटना बेहद जरूरी थी क्यों कि उनके डर के कारण बीजेपी समर्थक वोट नहीं डाल पाते। 

सुरक्षा बलों की सख्ती से चुनाव प्रभावित करने वाले गुंडे डर गये

पश्चिम बंगाल में भयमुक्त और निष्पक्ष चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने भी बहुत मुस्तैदी दिखायी। कड़क आइपीएस अधिकारी अजय पाल सिंह को चुनाव पर्यवेक्षक बना कर पश्चिम बंगाल भेजना इसकी एक बानगी है। फ्री एंड फेयर इलेक्शन के लिए पश्चिम बंगाल में 2 लाख 40 हजार से अधिक केन्द्रीय सुरक्षा बल के जवान तैनात किये गये। वह भी चुनाव से एक दो सप्ताह पहले। इससे तृणमूल की तथाकथित गुंडा वाहिनी, वोटरों को डरा-धमका नहीं सकीं। वोटरों को सुरक्षा मिली तो उन्होंने खुल कर मतदान किया। बंपर वोटिंग ने बीजेपी की किस्मत बदल दी। अमित शाह ने रणनीति बनायी थी कि जितने भी बीजेपी के वोटर हैं वे 11-12 बजे तक अपना वोट डाल दें। गुंडा तत्व दोपहर बाद ही सक्रिय होते हैं। लेकिन मतदान के दिन गुंडे बिल्कुल भी नजर नहीं आये। सुरक्षा बलों की सख्ती से वे बहुत डर गये थे। गुंडों पर रोक लगी तो बीजेपी के वोटर घरों से निकल बूथ तक आये।

Tags :

#breking news

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

जरूरी खबरें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

Related Posts