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ABN NEWS :- देश दुनिया : EC की सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीतः शीर्ष न्यायाल बोला- SIR प्रक्रिया वैध, इसमें कोई खामी नहीं, इसे करवाना चुनाव आयोग का अ

Abhyuday Bharat News / Wed, May 27, 2026 / Post views : 8

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Supreme Court Verdict On SIR: मतदाता सूची यानी वोटर लिस्ट (voter list) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम फैसला आ गया है। SIR पर चुनाव आयोग (election Commission) की सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीत हुई है। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया वैध है। इसमें कोई खामी नहीं है। एसआईआर करवाना चुनाव आयोग का अधिकार है। साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को संदिग्ध नागरिकता के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाए गए व्यक्तियों के नाम चार हफ्ते में केंद्र सरकार को भेजने का निर्देश भी दिया है।

देश के शीर्ष न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया है। अपनी शक्तियों के बाहर नहीं है। पूरी प्रक्रिया को गैर-संवैधानिक करार नहीं दे सकते। इलेक्शन कमिशन ने अपने अधिकार का सही इस्तेमाल किया है।

इन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिकाओं में पहले दावा किया गया था कि संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत चुनाव आयोग को इतने बड़े स्तर पर SIR कराने का अधिकार नहीं है। आज यानी 27 मई 2026 बुधवार को फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR की प्रक्रिया पूरी तरह वैध और कानूनी है।  

सीजेआई सूर्यकांत की नेतृत्व वाली बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि चुनाव आयोग को SIR के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है और यह मनमाना नहीं है। देश के शीर्ष न्यायालय ने कहा कि इस पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकती। कोर्ट ने कहा कि बिहार में SIR कराकर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का कोई उल्लंघन नहीं किया। इस तरह के अभ्यास से वोटर लिस्ट की शुद्धता सुनिश्चित हुई और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव में सहायता मिली है। चुनाव आयोग ने यह प्रक्रिया अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत की है।वोटर लिस्ट से नाम हटाने में नियमों का पालन किया गया और लोगों को नोटिस देने व अपनी बात रखने का मौका भी मिला। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि SIR के दौरान चुनाव आयोग ने किसी की नागरिकता तय नहीं कीय़ आय़ोग सिर्फ यह देखा कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल होने के योग्य है या नहीं। अदालत ने कहा कि SIR प्रक्रिया से किसी को नागरिकता मिलती या छिनती नहीं है।

देश के शीर्ष न्यायालय ने यह भी कहा कि कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे, यह तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है। आधार कार्ड को भी कोर्ट के आदेश के बाद दस्तावेजों की सूची में शामिल किया गया और यह व्यवस्था मनमानी नहीं है।

12 अगस्त को शुरू हुई थी अंतिम बहस

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 12 अगस्त को इस मामले पर अंतिम बहस शुरू की थी। तब कोर्ट ने यह कहा था कि कि वोटर लिस्ट में नामों को शामिल करना या उन्हें हटाना, चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र के तहत आता है। वहीं 29 जनवरी 2026 को लंबी सुनवाई के बाद इन याचिकाओं पर कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इनमें चर्चित NGO ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) द्वारा दायर याचिका भी शामिल थी। एसआईआर की अधिसूचना के अनुसार, जो वोटर्स 2002 या 2003 की वोटर लिस्ट में मौजूद नहीं थे, उन्हें उस समय की लिस्ट में मौजूद किसी व्यक्ति के साथ अपना ‘पुश्तैनी संबंध’ साबित करना था। तब चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया का बचाव करते हुए यह तर्क दिया था कि आधार कार्ड और वोटर ID कार्ड को नागरिकता को लेकर ‘पुख्ता सबूत’ नहीं माना जा सकता।

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