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अमेरिका में व्हाइट हाउस ने ट्रंप की पोस्ट को शेयर किया है, जिसमें ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है। सोशल मीडिया ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा है कि संवर्धित यूरेनियम (परमाणु धूल!) को या तो तुरंत अमेरिका को सौंप दिया जाएगा ताकि इसे वापस लाकर नष्ट किया जा सके, या बेहतर होगा कि ईरान के इस्लामी गणराज्य के साथ मिलकर और तालमेल से इसे वहीं नष्ट कर दिया जाए…।
हैदराबाद में ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने एक्स पर पोस्ट में ट्रंप को करारा जवाब देते हुए कहा-अगर ईरान आपको यूरेनियम देना चाहता, तो युद्ध शुरू होने से बहुत पहले ही दे चुका होता। अगर आप युद्ध के जरिए हमसे यूरेनियम छीन सकते, तो अब तक छीन चुके होते। अब आप बस अपने टूटे सपनों को दोहरा सकते हैं। एक भ्रमित और युद्ध अपराधी दोस्त पर भरोसा करने की यही कीमत है।
अमेरिकी न्यूज चैनल CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ईरानी मिसाइल प्रक्षेपण स्थलों और नौकाओं को निशाना बनाते हुए 'आत्मरक्षा में हमले' किए। अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच पहले भी युद्धविराम के दौरान गोलीबारी हो चुकी है और यह स्पष्ट नहीं है कि इन हमलों का युद्धविराम पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
वहीं, सीएनएन को एक राजनयिक सूत्र ने बताया कि कतर के मध्यस्थों और अमेरिका के तालमेल से ईरान के बीच दोहा में सोमवार को वार्ता जारी रही। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका और ईरान एक समझौता ज्ञापन पर पहुंचने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों से संबंधित भाषा को लेकर विवादों के कारण समझौता रुका हुआ है।
यूरेनियम एक प्राकृतिक तत्व है, जो पृथ्वी की सतह पर पाया जाता है। यह U‑238 और U‑235 जैसे दो आइसोटोप से मिलकर बना होता है।
प्राकृतिक यूरेनियम का 99 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सा U‑238 होता है, जो आसानी से परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया को बनाए नहीं रख पाता।
वहीं, U‑235 महज करीब 0.7 फीसदी हिस्सा होता है। यह ऐसा आइसोटोप है जो आसानी से टूट जाता है और ऊर्जा छोड़ता है। इसे परमाणु विखंडन कहा जाता है।
यूरेनियम को उपयोगी बनाने के लिए उसमें U‑235 का अनुपात बढ़ाया जाना जरूरी होता है। इसे करने की प्रक्रिया को 'संवर्धन' कहा जाता है।
सबसे पहले यूरेनियम को गैस में बदला जाता है। फिर इस गैस को सेंट्रीफ्यूज में डाला जाता है। ये ऐसी मशीनें होती हैं जो बहुत तेज गति से घूमती हैं।
घूमने के दौरान भारी U‑238 थोड़ा बाहर की तरफ़ खिसक जाता है, जबकि हल्का U‑235 केंद्र के पास ही रहता है।
कम संवर्धित यूरेनियम में आमतौर पर 3-5 फीसदी तक U‑235 होता है। वहीं, यह वाणिज्यिक परमाणु बिजली घरों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, यह हथियार बनाने के लिए जरूरी स्तर से काफी कम होता है।
बहुत ज्यादा संवर्धित यूरेनियम में 20 फीसदी या उससे अधिक U‑235 होता है। रिसर्च रिएक्टरों में इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं हथियार‑ग्रेड यूरेनियम को आम तौर पर करीब 90% तक संवर्धित किया जाता है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, युद्ध की शुरुआत में ईरान के पास करीब 440 किलो यूरेनियम था, जिसे 60 फीसदी तक संवर्धित किया जा चुका था। इस सामग्री को हथियार‑ग्रेड यूरेनियम के लिए ज़रूरी 90 फीसदी स्तर तक अपेक्षाकृत तेजी से संवर्धित किया जा सकता है।
ईरान के पास करीब 1,000 किलो यूरेनियम 20 फीसदी तक संवर्धित रूप में भी है। लगभग 8,500 किलो यूरेनियम करीब 3.6 फीसदी तक संवर्धित है, जिसका आम तौर पर ऊर्जा उत्पादन या मेडिकल रिसर्च में इस्तेमाल होता है।
ईरान का परमाणु हथियार बनाने के लिए ज्यादा संवर्धित यूरेनियम इस्फहान में रखा गया है। यह संयंत्र ईरान के तीन भूमिगत परमाणु ठिकानों में से एक है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफाएल ग्रॉसी ने पिछले साल अक्टूबर में कहा था कि यदि इस मात्रा को और संवर्धित किया जाए, तो यह 10 परमाणु बमों के लिए काफ़ी होगी।
हालांकि, ईरान का कहना है कि उसकी सभी परमाणु सुविधाएं पूरी तरह शांतिपूर्ण हैं, और आईएईए का भी कहना है कि उसे किसी सक्रिय परमाणु हथियार कार्यक्रम के सबूत नहीं मिले हैं।
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