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पिछले एक दशक में अजरबैजान में भारत के कुल निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यूरेशियन डेवलपमेंट बैंक (EDB) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में जहां भारतीय निवेश 480 मिलियन डॉलर था, वहीं 2025 की पहली छमाही के अंत तक यह बढ़कर 1.26 अरब डॉलर पहुंच गया। इससे अज़रबैजान की अर्थव्यवस्था में भारत का कुल निवेश 1.26 अरब डॉलर हो गया है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अजरबैजान ने युद्धग्रस्त ईरान से लगभग 200 भारतीय नागरिकों की स्वदेश वापसी में मदद की।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में अजरबैजान से भारत में प्रत्यक्ष निवेश नहीं दर्ज किया गया है, जो कि द्विपक्षीय पूंजी प्रवाह में असंतुलन दर्शाता है और भारतीय बाजार में अजरबैजानी निवेशकों के लिए अनछुए अवसरों का संकेत देता है।
ऊर्जा क्षेत्र, विशेष रूप से तेल और गैस, लॉजिस्टिक्स, फार्मास्युटिकल्स और आईटी सेवाएं भारतीय कंपनियों के लिए प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं। अजरबैजान की भौगोलिक स्थिति यूरोप और एशिया के बीच व्यापारिक गलियारे के रूप में महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिससे भारतीय कंपनियों को नए निर्यात मार्ग और बाजारों तक पहुंच मिल सकती है।
अजरबैजान कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करता है
भारत इसे अपने आंतरिक मामलों में अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप के रूप में देखता है।
तुर्की अक्सर भारत के खिलाफ विवादित बयान देता है, जबकि अजरबैजान के तुर्की के साथ घनिष्ठ सैन्य और राजनीतिक संबंध हैं
अजरबैजान के आर्मेनिया के साथ तनाव है, जबकि भारत आर्मेनिया को सैन्य उपकरण देता है।
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