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Madhyapadesh : सीहोर में कानून व्यवस्था तार-तार: राजस्व-पुलिस के संरक्षण में गुंडागर्दी, तहसीलदार के पत्र के बाद भी फरियादी पर कुल्हाड़

Abhyuday Bharat News / Thu, Jul 2, 2026 / Post views : 132

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सीहोर। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की नाक के नीचे अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब उन्हें न तो राजस्व अधिकारियों का खौफ है और न ही खाकी का डर। ताजा मामला श्यामपुर तहसील के ग्राम पीलूखेड़ी से सामने आया है। जहां रसूखदारों और भू-माफियाओं ने कानून को ठेंगे पर रखते हुए एक वैध भूमि स्वामी पर जानलेवा हमला कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि यह वारदात तब हुई जब खुद तहसीलदार श्यामपुर ने पुलिस को पत्र लिखकर सुरक्षा व्यवस्था के बीच बुआई कराने के निर्देश दिए थे और मौके पर हल्का पटवारी के साथ पुलिस बल मौजूद था। इसके बावजूद सरेआम कुल्हाड़ी और लाठियों से खून-खराबा कर दिया गया, जो सीहोर पुलिस और राजस्व विभाग की घोर लापरवाही और मिलीभगत की तरफ साफ इशारा करता है।

​साहब के आदेश की उड़ी धज्जियां

मूकदर्शक बनी रही पुलिस आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, भोपाल निवासी आवेदक अवधेश सेंगर की ग्राम पीलूखेड़ी स्थित निजी स्वामित्व की कृषि भूमि कुल रकबा 3.236 हेक्टेयर पर कब्जा करने और फसल बोने से रोकने की नीयत से आरोपी विश्राम सिंह, पर्वत सिंह, राजेंद्र, सीताबाई, छिप्रा बाई और कलावती बाई लगातार विवाद कर रहे थे। इस संबंध में तहसीलदार श्यामपुर की ओर से बकायदा पत्र जारी कर पुलिस से सुरक्षा बल मांगा गया था ताकि आवेदक शांतिपूर्ण तरीके से बुआई कर सके।

निर्देशानुसार हल्का पटवारी नंबर 13 और अहमदपुर थाने के पुलिस अधिकारी मौके पर तैनात भी हुए। लेकिन जैसे ही बुआई का काम शुरू हुआ, आरोपियों ने तैश में आकर घातक हथियारों कुल्हाड़ी और लाठी से लैस होकर आवेदक और उसके सहयोगियों पर धावा बोल दिया। बड़ा सवाल यह उठता है कि जब मौके पर पुलिस और पटवारी मौजूद थे, तो आरोपियों में इतना दुस्साहस कहां से आया कि उन्होंने सरेआम जानलेवा हमला कर दिया? क्या पुलिस वहां केवल तमाशबीन बनने गई थी या फिर अपराधियों को अंदरूनी सह दी गई थी?

​तहसीलदार के पंचनामे ने खोली पोल, फिर भी सुस्त रही अहमदपुर पुलिस

घटनास्थल पर मौजूद सरकारी अमले के सामने हुए इस तांडव के बाद खुद तहसीलदार कार्यालय की ओर से तैयार पंचनामे में यह स्पष्ट स्वीकार किया गया है कि अनावेदकों द्वारा आवेदक की वैध भूमि पर शांतिपूर्ण कृषि कार्य में बाधा उत्पन्न करते हुए घातक हथियारों से हमला कर कानून व्यवस्था को भंग किया गया। यह कृत्य सीधे तौर पर एक गंभीर और दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। खुद तहसीलदार ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने को कहा।

इसके बावजूद अहमदपुर पुलिस ने मामले को बेहद हल्के में लिया और खानापूर्ति करते हुए धारा 221, 132, 115(2), 3(5) बीएनएस के तहत मामूली कार्रवाई का ढोंग रचा। जनता अब यह पूछ रही है कि जब शासकीय अमले की मौजूदगी में कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला हुआ, तो पुलिस ने हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज क्यों नहीं किया? क्या पुलिस रसूखदार हमलावरों को बचाने का प्रयास कर रही है? सीहोर का राजस्व और पुलिस महकमा पूरी तरह से कटघरे में है, और यदि इस सांठगांठ की उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो पीड़ित परिवार को न्याय मिलना असंभव है।

क्या है पूरा मामला

श्यामपुर क्षेत्र में किसान की जमीन पर बोवनी कराने गई राजस्व और पुलिस टीम पर कुछ लोगों ने लाठियो डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में तहसीलदार, पटवारी, महिला आरक्षक सहित पांच लोग घायल हैं। जिन्हें काफी चोट पहुंची है। पटवारी की शिकायत पर थाना अहमदपुर में मुकदमा पंजीकृत कर मामले को जांच में लिया गया है। जानकारी के अनुसार, श्यामपुर अंतर्गत आने वाले गांव पीलूखेड़ी में अवधेश कुमार की जमीन पर श्यामपुर तहसीलदार श्याम नंदन चंदेले राजस्व और पुलिस टीम को लेकर बोवनी के लिए पहुंचे थे। तभी उक्त जमीन पर लंबे समय से अवैध कब्जा किए हुए लोगों ने राजस्व और पुलिस टीम पर लाठी डंडों से हमला कर दिया। करीब करीब एक दर्जन लोगों ने तहसीलदार पटवारी आरक्षक को डंडों से दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।

इस मामले में हल्का पटवारी सुमित मीणा ने अहमदपुर पुलिस ने 6 लोगों की नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है। हमले में पटवारी सुमित मीणा, महिला आरक्षक वैशाली, किसान अवधेश सेंगर, शुभम जाटव और बसंती बाई को काफी चोट पहुंची है। इस संबंध में थाना अहमदपुर टी रमन सिंह ठाकुर ने बताया कि पटवारी की शिकायत पर थाना अहमदपुर पुलिस ने 6 लोगों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा और मारपीट की धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने विश्राम मेवाड़ा राजेंद्र मेवाडा पर्वत मेवाड़ा और सीता बाई, कलावती, शिप्रा बाई के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

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