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BILASPUR : सतनाम बाड़ा विद्याडीह में माता सहोदरा जन कल्याण समिति के द्वारा सशक्त महिला - सशक्त समाज इस संबंध में आवश्यक बैठक

Abhyuday Bharat News / Mon, May 18, 2026 / Post views : 373

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को सतनाम बाड़ा विद्याडीह में माता सहोदरा जन कल्याण समिति के द्वारा सशक्त महिला - सशक्त समाज इस विषय के अंतर्गत “नारी सशक्तिकरण: शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता, अधिकार एवं नारी सम्मान एवं सुरक्षा आदि बिंदुओं को लेकर अति महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया । इस आयोजन में समाज के प्रबुद्ध जनों ने समाज की मजबूती या सशक्त होने के लिए महिलाओ पर निर्भरता को सामूहिक रूप से स्वीकारा ।

कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं संगीतमय गुरु वंदना से हुई और सतनाम बाड़ा के संचालक गुरुजी बसंत जांगड़े ने सतनाम बाड़ा का संक्षिप्त इतिहास और अब तक लगातार सतनाम बाड़ा द्वारा किए गए प्रयासों की जानकारी साझा किया। तत्पश्चात यामिनी गांगीले , सोनम घृतलहरे , योगी मधुकर, प्राची गेंदले, युवराज घृतलहरे, भाग्यलक्ष्मी सहित नन्हे मुन्ने बच्चों ने अपनी तैयारी अनुरूप इस विषय पर बहुत ही संक्षिप्त और सारगर्भित बाद रखें । वक्ताओं में धीमंत प्रदीप बंजारे सर , गुरुजी मन्नू कुर्रे , डॉ दुर्गा प्रसाद मेरसा , धीमंत हरीश पंडाल , धीमंत टेकचंद पंडाल, मालिक राम घृतलहरे और धीमंत रजनी कोसले , धीमंत रामकली अंचल सभी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में विषय के अनुरूप अपनी बातों को गंभीरता से रखें बिहारीलाल कोसले जी द्वारा शानदार कविता वाचन किया गया ।

सशक्त महिला सशक्त समाज के अंतर्गत सभी वक्ताओं ने गुरुपुत्री माता सोदरा , सुंदरी माता और ममतामई माता मिनी माता जी के महत्वपूर्ण योगदान को याद करते हुए भारत वर्ष में विभिन्न महिलाओं द्वारा महिला सशक्तिकरण पर किए गए कार्यों को याद किये सभी ने माता रमा बाई ,क्रांतिज्योति माता सावित्री बाई फूल को याद करते हुए इस बात की साझा प्रतिक्रिया दिए कि महिलाएं जब नेतृत्व करती हैं तो समाज में आमूल चूल परिवर्तन हुआ है ।

महिला वक्ताओं सहित अन्य वक्ताओं ने भी इस बात को स्वीकार किए कि समाज में व्याप्त रूढ़िवादी विचारधारा अंधविश्वास एवं परंपरागत चली आ रही मान्यताओं ने महिलाओं को गुलाम बनाकर रखा है जब तक महिलाएं इन गुलामी की जंजीरों को पहचान कर उन्हें तोड़ने के लिए सक्षम नहीं होती तब तक ये बाधाएं इन्हें सक्षम बनने में रोड़ा उत्पन्न करती रहेगी और समाज तथा राष्ट्र का दिशा और दशा सोच के अनुरूप सिद्ध नहीं हो सकेगा ।

समाज में नवीन रुढ़ीगत धारणाओं को मजबूत करने वाले तत्वों की सभी ने एक स्वर में आलोचना व निंदा की यहां तक की मूर्ति पूजा की कठोर विरोध करने वाले गुरु घासीदास के विचारों के अनुरूप समाज का संचालन न होना गुरु घासीदास के विचार के साथ न्याय नहीं करने की बात की समर्थन किया लोगों ने गद्दी पूजा की आलोचना करते हुए कहा कि हमें गद्दी पूजा नहीं बल्कि गद्दी में बैठने लायक अर्थात शासन करती जमात बनने की जरूरत है जिस तरह से गुरु घासीदास जी ने अपने द्वितीय पुत्र गुरु बालक दास जी को राजा बनाकर समाज का नेतृत्व किए आज उसी तरह हमारे लोगों की सोच एक शासन करते जमात की तरह होना चाहिए इस बात पर सभी ने सामूहिक सहमति जाहिर की।

बदलते शिक्षा , स्वास्थ्य और रोजगार के आयामों को याद करते हुए लोगों ने कहा कि आज के अनुरूप हमें अपने आने वाली पीढ़ी को तैयार करने की जरूरत है शिक्षा , चिकित्सा ,रोजगार का स्वरूप लगातार परिवर्तनशील है ऐसे में हमें आज के अनुरूप अपने बच्चों को संस्कारीत शिक्षण ( Cultured Education)देने की जरूरत है।

प्रबुद्ध जनों ने युवा पीढ़ी की ओर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आज के युवा बदलते परिवेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में अपने आप को उसके लायकी का सिद्ध नहीं कर पा रहे हैं जिस तरह की सुविधा उन्हें दी जा रही है उनका बेहतर इस्तेमाल नहीं कर पाना उनके भविष्य के लिए बहुत बड़ा खतरा साबित हो सकता है इस बात पर चिंता जाहिर किया तथा उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को समझ कर अपने जीवन में बेहतर तरीके से समाज को संचालन करने लायक बनने की बात पर बल दिए।

जाति पर घमंड करना और इसे मजबूत करने वाले कार्यों को बढ़ावा देने पर प्रबोधकों ने चिंता व्यक्त करते हुए इस रोग से मुक्त राष्ट्र निर्माण को प्रथम कर्त्तव्य माना । इसी ने हमें हमेशा से श्रेणीगत विषमता और असमान अवसर को बढ़ावा दिया । यही जाति ही है जो सामाजिक लोकतंत्र स्थापना सबसे बड़ी बाधा है जिसने एक राष्ट्र को राष्ट्र बनने से रोक रखा है। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन धीमंत विजय कुमार हिरवानी के द्वारा किया गया ।

इस कार्यक्रम में सुंदरलाल डॉक्टर जीवन लाल जीवनलाल लहरे चौवन गेंदले चंद्रिका प्रसाद गोफेलाल मालिकराम गया राम तुलसीराम सुखदास पंडित सोखीलाल पंडित भोजन निर्माण में संचालिका कुसुमलता जांगड़े श्यामप्यारी का विशेष सहयोग आसपास के महिला समूह का सक्रिय योगदान रहा

अंत में पंडित दिलहरण गांगिले द्वारा आभार व्यक्त करते हुए सभी को भोजन ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया गया और इस बात की सहमति सभी महिलाओं ने और उपस्थित सभा ने दिया कि हमें क्रांतिज्योति माता सावित्रीबाई फुले के इस कथन के अनुरूप कार्य करना होगा ; "जागिये ,उठिए शिक्षित बनिए , परंपरा को कुचलकर मुक्त हो जाइए ।"

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#CG NEWS

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