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ABN NEWS :- देश दुनिया : चीन ने मारी 'लात' तो भारत की शरण में अमेरिका! रिश्तों को रफू करने आ रहे रूबियो?

Abhyuday Bharat News / Fri, May 22, 2026 / Post views : 35

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का भारत दौरा ऐसे अहम समय में हो रहा है, जब भारत पश्चिम एशिया संकट के चलते एनर्जी क्राइसिस से जूझ रहा है। वहीं, भू-राजनीतिक समीकरण भी तेजी से बदल रहे हैं।

नई दिल्ली: हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर थे। जमकर स्वागत-सत्कार भी हुआ, मगर ट्रंप जब अमेरिका लौटे तो ज्यादा खास नहीं लेकर गए। ऐसा मीडिया रिपोर्टों का दावा है। रिपोर्टों में कहा गया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग बार-बार चीन को महान ताकत बता रहे थे, मगर वह चाहे-अनचाहे ट्रंप के अमेरिका को भी फिर से महान बनाने की बात पर सहमति भी जता रहे थे। जाहिर है, चीन और अमेरिका के बीच दुनिया की महाशक्ति बनने की होड़ तो है, मगर देखने वाली बात यह है कि अमेरिका और चीन दोनों के लिए दुनिया की बड़ी शक्ति के रूप में उभर रहे भारत की भूमिका को नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो 23 से 26 मई तक भारत के दौरे पर रहेंगे। विदेश मंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा, जिसे भारत-अमेरिका संबंधों और प्रशांत क्षेत्र में क्वॉड (QUAD) की मजबूती के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। साथ ही उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के संबंध लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। वे दशकों की प्रगति के बाद दिशाहीन हो रहे संबंधों को पुनर्जीवित करने और रिश्तों को सुधारने की कोशिश भी करेंगे। ट्रंप ने भारत को नर्क से भी बदतर और डेड इकनॉमी बताया था, जिससे दोनों देशों के रिश्ते सहज नहीं रह गए हैं।

मिलिए 140 करोड़ लोगों की नए भारत के ढांचे से

यूएस इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) में सीनियर एडवाइजर AI Mason ने सोशल मीडिया एक्स पर भारत-अमेरिका रिश्तों पर एक लेख भी लिखा है। उन्होंने रूबियो को संबोधित करते हुए कहा है-मिलिए 140 करोड़ लोगों की नए भारत के ढांचे से। उन्होंने लिखा-भारतीय राजधानी में, विदेश मंत्री मार्को रुबियो सीधे एक विशिष्ट भू-राजनीतिक कसौटी पर कदम रखेंगे, जहां वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सुव्यवस्थित रणनीतिक दल के सामने बैठेंगे।

जयशंकर और डोभाल की तारीफ कर रहा अमेरिका

मैसन ने लिखा-भारतीय पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर कर रहे हैं, जिनकी बौद्धिक क्षमता और तीक्ष्ण रणनीतिक समझ ने आधुनिक गुटनिरपेक्षता को मौलिक रूप से परिभाषित किया है। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल वास्तविक राजनीति के दिग्गज और शांत स्वभाव के सूत्रधार हैं। वह कूटनीतिक दिखावे के बजाय ठोस परिणामों को प्राथमिकता देते हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी, जो उच्च दांव वाली, शांत वार्ताओं में जरूरी सेतु का काम करते हैं।


रूबियो बोले-अमेरिका भारत को देगा भरपूर एनर्जी

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने गुरुवार को भारत को एक ग्रेट पार्टनर बताया और कहा कि अमेरिका नई दिल्ली के साथ अपने ऊर्जा संबंधों का विस्तार करना चाहता है। रूबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका भारत को और अधिक एनर्जी बेचने के लिए तैयार है, क्योंकि वॉशिंगटन लगातार अपना उत्पादन और निर्यात बढ़ा रहा है।

रूबियो के दौरे के वक्त भारत-अमेरिका के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और रक्षा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। एनुअल सेलेक्ट इनवेस्टमेंट समिट में बोलते हुए रूबियो ने भारतीय कंपनियों के 20 मिलियन बिलियन डॉलर के निवेश की उम्मीद जताई है।

QUAD को मजबूत करना चाहता है अमेरिका

रूबियो के दौरे के वक्त प्रशांत क्षेत्र में, जिसके विदेश मंत्रियों की बैठक नई दिल्लीQUAD को मजबूत करने पर भी बात होगी में हो रही है। नई दिल्ली में 26 मई को क्वॉड देशों भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने की भी संभावना है। इससे Indo-Pacific क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को और मजबूती मिल सकती है। क्वॉड का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त, खुला, समृद्ध और सुरक्षित बनाना है। इस दौरान भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को फाइनल करने पर मुहर लग सकती है।

पर्दे के पीछे दो व्यक्ति बड़ी घटना को दे रहे अंजाम

सोशल मीडिया एक्स पर एक एक्सपर्ट ने लिखा-दुनिया के दो अलग-अलग हिस्सों में दो व्यक्ति पर्दे के पीछे चुपचाप एक 'बड़ी घटना' को अंजाम देने के लिए काम कर रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत में होंगे। उनकी यह यात्रा ऑपरेशन सिंदूर के खत्म होने, व्यापार संबंधों में टैरिफ को लेकर आए तनाव और अप्रैल 2025 में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस की भारत यात्रा के बाद से ट्रंप कैबिनेट के किसी सदस्य की सबसे उच्च स्तरीय मुलाकात है।

दोनों देशों के बीच रणनीतिक अस्पष्टता को दूर किया जाएगा

'मोदी एंड इंडिया' नाम की किताब लिखने वाले ने कहा-तब से लेकर अब तक, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने (पहले वॉशिंगटन में और अब दिल्ली में) एक बदलाव लाने वाले एजेंट के रूप में लगन से काम किया है, ताकि उस साझेदारी को फिर से सक्रिय किया जा सके जो कुछ समय के लिए ध्यान भटकाने वाली बातों और रणनीतिक अस्पष्टता से घिरी हुई थी। गोर के प्रयासों का मुख्य उद्देश्य व्यापक रणनीतिक संबंधों को शुल्क विवादों से बचाना, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर बातचीत को गति देना और दोनों राजधानियों में राजनीतिक उथल-पुथल के कारण धीमी पड़ चुकी पहलों को प्रशासनिक गति प्रदान करना रहा है।

भारत रणनीतिक रूप से अहम, मगर अपरिहार्य नहीं

दरअसल, पदभार ग्रहण करने के बाद से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान से पहले पाकिस्तान के साथ अमेरिकी संपर्क को तेज किया। साथ ही चीन के साथ भी संबंध बनाए रखे, जिसका परिणाम कुछ दिन पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक तनावपूर्ण बैठक के रूप में सामने आया। इन कदमों ने भारत के रणनीतिक समुदाय के कुछ वर्गों में स्वाभाविक रूप से बेचैनी पैदा कर दी, जो पहले से ही इस संभावना से जूझ रहे थे कि भारत वॉशिंगटन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तो बना रहेगा, लेकिन अब अपरिहार्य नहीं रहेगा।

एक्सपर्ट ने कहा-क्वॉड ढांचे को मजबूत किए जाने पर काम

फिर भी, इस अवधि की विशेषता यह रही है कि व्यापार और शुल्कों पर तीखी बहस के बावजूद, व्यापक रणनीतिक साझेदारी काफी हद तक कायम रही है।क्वॉड ढांचे, खुफिया जानकारी साझा करने वाले तंत्र, रक्षा खरीद, आईसीईटी ढांचे के तहत सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी पहलों के साथ-साथ समुद्री क्षेत्र जागरूकता में चल रहे सहयोग में निरंतरता बनी रही है। संबंधों के अन्य क्षेत्रों में राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद जेट इंजन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती को लेकर होने वाली चर्चाओं ने भी अपनी गति बनाए रखी है।

जून में मोदी और ट्रंप के बीच जी-7 में मुलाकात संभव

दिल्ली में अगले कुछ दिनों में, रुबियो और गोर अपने भारतीय समकक्षों के साथ मिलकर जून में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच होने वाली संभावित महत्वपूर्ण बैठक से पहले, साझा क्षेत्रों को फिर से जोड़ने और मजबूत करने का प्रयास करेंगे। यह बैठक फरवरी 2025 के बाद दोनों प्रमुखों के बीच पहली आमने-सामने की बातचीत होगी।

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