Thu, 28 May 2026
Logo

ब्रेकिंग

SC के SIR पर फैसले से चुनाव आयोग बहुत खुश हुआ, असली वजह हैं, संविधान का अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व कानून

ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार- 1 जुलाई से लागू होगा वीबी-जी-राम-जी मिशन, अब मिलेगा 125 दिनों का गारंटीड रो

’बारनवापारा के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी’

रायपुर : ’तेन्दूपत्ता संग्रहण में छत्तीसगढ़ ने बनाया नया रिकॉर्ड, अब तक 13.52 लाख मानक बोरा संग्रहित’

रायपुर : भीषण गर्मी में सतर्कता और संवेदनशीलता बरतें, जरूरतमंदों का सहारा बनें - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

प्रगतिशील सतनामी समाज के द्वारा मस्तूरी में 31 मई को कार्यक्रम आयोजित

अग्निवीर में चयनित युवाओं का सम्मान

लगातार दूसरी बार आईपीएल के फाइनल में पहुंची बेंगलुरु, गुजरात को 92 रन से दी करारी शिकस्त, बल्लेबाजों के बाद गेंदबाजों ने

रणवीर सिंह पर FWICE का बैन, ‘डॉन 3’ छोड़ने के फैसले से मचा बॉलीवुड में हंगामा

टीएमसी में भगदड़ः 50 विधायक और 20 सांसद पाला बदलने को तैयार, एक दिन पहले 101 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दिया था

सूचना

ABN NEWS :- देश दुनिया : 'भारत' को लेकर दुनिया भर के देशों से क्यों बोल पड़ा ईरान- आप सब जानते हैं बॉस कौन है?

Abhyuday Bharat News / Thu, Apr 16, 2026 / Post views : 104

Share:

ईरान ने पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की स्थिति की ओर ध्यान खींचा है। भारत में ईरानी दूतावास ने संकेतों में यह बताने की कोशिश की थी कि जब दुनिया भर में युद्ध की वजह से तबाही वाले हालात हैं, भारत में फिर भी सुकून है।

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर कायम रखने को लेकर दूसरे दौर की बातचीत की कोशिशों के बीच भारत में ईरानी दूतावास ने विश्व भर में मौजूद ईरानी दूतावासों को बहुत बड़ा संकेत भेजा। यह संकेत भारत को लेकर है। ईरान को लगता है कि पश्चिम एशिया संकट की वजह से दुनिया भर में जो मुश्किल हालात पैदा हुए हैं, भारत कहीं न कहीं उससे खुद को बहुत ज्यादा प्रभावित होने से बचा लिया

 है।

ईरान ने भारत में पूरा सुकून बताया

भारत में ईरानी दूतावास ने अपने एक्स हैंडल पर एक लाइन का एक पोस्ट किया, जो सीधे तौर परमौजूदा जियोपॉलिटिक्स में भारत की स्थितिकी ओर इशारा करता है। हालांकि, बाद में ईरानी दूतावास ने वह ट्वीट डिलीट कर दिया। लेकिन, इसमें जो तस्वीरें लगी थीं और जो लिखा गया था, उसकी अहमियत खत्म नहीं हुई है।

युद्ध की वजह से कई देशों के हालत खराब

इस एक्स पोस्ट को दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, यूनाइटेड किंगडम, जिम्बाब्वे और बुल्गारिया स्थित ईरानी दूतावासों को टैग किया गया है। यह ट्यूनीशिया स्थित ईरानी दूतावास के एक पोस्ट के जवाब में है, जिसे ईरान युद्ध की वजह से भारी मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं।

युद्ध की वजह से संकट में ट्यूनीशिया

दरअसल, ट्यूनीशिया दुनिया के उन देशों में शामिल है, जिसकी पहले से खराब अर्थव्यवस्थापश्चिम एशिया युद्धकी वजह से पूरी तरह से चरमरा गई है।
ईरान युद्ध की वजह से उसे योजनागत बजट में संशोधन की नौबत आ चुकी है, खर्चे कम करने पड़ रहे हैं।


बस करो, यारों- तुमको तो पहले से ही१ पता है कि बॉस कौन है।

भारत में ईरानी दूतावास


युद्ध के बाद भी भारत की मजबूत इकॉनमी

  • पश्चिम एशिया संकट के बाद भी भारत का निर्यात वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड पर पहुंच गया है।

  • भारत ने 441.8 अरब डॉलर का निर्यात किया है, जो कि पिछले वित्त वर्ष से भी 1% ज्यादा है।

  • आईएमएफ ने भारत पर मंडराते तेल और गैस संकट के बावजूद वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.5% रहने का अनुमान जताया है।

  • यह आईएमएफ के ही जनवरी के अनुमानों से 0.1% अधिक है।

  • इसी तरह एडीबी ने चालू वित्त वर्ष में 6.9% और अगले वित्त वर्ष के लिए 7.3% जीडीपी वृद्धि दर की भविष्यवाणी की है।


भारत की कूटनीति को लेकर दूर हुई आशंकाएं

  • 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला बोला था तो इस तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं कि भारत की कूटनीति हमलावरों की ओर झुकी हुई है।

  • खासकर जिस तरह से ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई खामेनेई की इन हमलों में मौत हुई, उसपर भारत की शुरुआती चुप्पी ने आशंकाओं को और हवा दी।

  • लेकिन, जैसे ही आधिकारिक तौर पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 5 मार्च, 2026 को दिल्ली में ईरानी दूतावास जाकर औपचारिक तौर पर खामेनेई को श्रद्धांजलि दी, सारी आशंकाएं संभावनाओं में बदलनी शुरू हो गई।


युद्ध शुरू के बाद भारत-ईरान-अमेरिका संबंध

  • तथ्य यह है कि ईरान की सहमति से जितने भी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे हैं, उनमें सबसे ज्यादा संख्या भारतीय जहाजों की है।

  • ईरान ने यह भी कहा है कि उसने एक भी भारतीय जहाज से कोई भी टोल नहीं लिया है।

  • दूसरी तरफ भारत का अमेरिका और इजरायल के साथ भी पहले की तरह ही अलग कूटनीति चल रही है।

  • युद्ध शुरू होने से पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल होकर आए हैं तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो-दो बार उनसे फोन पर लंबी बातचीत करके पश्चिम एशिया संकट पर भरोसे में लेने की कोशिश की है।

  • पीएम मोदी से लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिसरी तक, दुनिया भर के वैश्विक नेताओं के साथ संपर्क में हैं, जिनमें युद्ध में शामिल तमाम देश भी शामिल हैं।

  • इस तरह से भारत ने इस वैश्विक संकट की घड़ी में भी राष्ट्रहित को हमेशा प्राथमिकतायुद्ध के बाद भी भारत की मजबूत इकॉनमी

  • पश्चिम एशिया संकट के बाद भी भारत का निर्यात वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड पर पहुंच गया है।

  • भारत ने 441.8 अरब डॉलर का निर्यात किया है, जो कि पिछले वित्त वर्ष से भी 1% ज्यादा है।

  • आईएमएफ ने भारत पर मंडराते तेल और गैस संकट के बावजूद वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.5% रहने का अनुमान जताया है।

  • यह आईएमएफ के ही जनवरी के अनुमानों से 0.1% अधिक है।

  • इसी तरह एडीबी ने चालू वित्त वर्ष में 6.9% और अगले वित्त वर्ष के लिए 7.3% जीडीपी वृद्धि दर की भविष्यवाणी की है।

  • भारत की कूटनीति को लेकर दूर हुई आशंकाएं

  • 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला बोला था तो इस तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं कि भारत की कूटनीति हमलावरों की ओर झुकी हुई है।

  • खासकर जिस तरह से ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई खामेनेई की इन हमलों में मौत हुई, उसपर भारत की शुरुआती चुप्पी ने आशंकाओं को और हवा दी।

  • लेकिन, जैसे ही आधिकारिक तौर पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 5 मार्च, 2026 को दिल्ली में ईरानी दूतावास जाकर औपचारिक तौर पर खामेनेई को श्रद्धांजलि दी, सारी आशंकाएं संभावनाओं में बदलनी शुरू हो गई।

  • युद्ध शुरू के बाद भारत-ईरान-अमेरिका संबंध

  • तथ्य यह है कि ईरान की सहमति से जितने भी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे हैं, उनमें सबसे ज्यादा संख्या भारतीय जहाजों की है।

  • ईरान ने यह भी कहा है कि उसने एक भी भारतीय जहाज से कोई भी टोल नहीं लिया है।

  • ईरान की ओर से बार-बार भारतीय जनता, भारत सरकार को सहयोग के लिए सराहना की जा रही है और दोनों देशों की मित्रता के कसीदे पढ़े जा रहे हैं।

  • दूसरी तरफ भारत का अमेरिका और इजरायल के साथ भी पहले की तरह ही अलग कूटनीति चल रही है।

  • युद्ध शुरू होने से पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल होकर आए हैं तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो-दो बार उनसे फोन पर लंबी बातचीत करके पश्चिम एशिया संकट पर भरोसे में लेने की कोशिश की है।

  • पीएम मोदी से लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिसरी तक, दुनिया भर के वैश्विक नेताओं के साथ संपर्क में हैं, जिनमें युद्ध में शामिल तमाम देश भी शामिल हैं।

  • इस तरह से भारत ने इस वैश्विक संकट की घड़ी में भी राष्ट्रहित को हमेशा प्राथमिकता दी है, लेकिन सभी देशों के साथ रिश्ते भी पहले की तरह बनाए रखे हैं। दी है, लेकिन सभी देशों के साथ रिश्ते भी पहले की तरह बनाए रखे हैं।

Tags :

# International News

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

जरूरी खबरें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

Related Posts