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उत्तर प्रदेश न्यूज़ : अज़ान और नमाज़ से इतनी परेशानी क्यों, AIMIM अध्यक्ष ने कहा- सड़कों पर नमाज पढ़ना नहीं छोड़ेंगे

Abhyuday Bharat News / Sat, May 30, 2026 / Post views : 153

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AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि नमाज पर लोगों की आपत्तियां एक दोहरी मानसिकता को दर्शाती है। असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाते हुए कहा कि और भी समुदायों की ओर से आयोजित धार्मिक यात्राओं, धार्मिक जुलूसों पर इसी तरह की चिंताएं क्यों नहीं जताई जातीं है। हमेशा मुसलमानों को जानबूझकर निशाना बनाया जाता है। उनके धार्मिक मामलों को विवाद के तौर पर खड़ा किया जाता है। लोगों को अज़ान और नमाज़ से इतनी परेशानी क्यों होती है।

असदुद्दीन ओवैसी ने 29 मई 2026 को एक कार्यक्रम में कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में कई मुस्लिम विद्वानों और धार्मिक नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

ईद मिलाप एक प्रोग्राम के दौरान AIMIM अध्यक्ष ने कहा कि जब भी मुसलमानों का पर्व बकरीद, रमज़ान या कोई दूसरा मुस्लिम त्योहार आता है तो दूसरे समुदायों को बेचैनी होने लगती है और वो लोग धार्मिक मुद्दों को लेकर विवाद खड़ा कर देते है। भारत की आजादी की लड़ाई में कई मुस्लिम विद्वानों और धार्मिक नेताओं ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपनी जान तक कुर्बान कर दी।

आज ऐसे लोगों का योगदान भुलाकर अज़ान और नमाज़ को मुद्दा बनाया जा रहा है। देश में और भी कई धार्मिक यात्राओं और जुलूसों के दौरान सड़कें बंद होती हैं, टेंट लगाए जाते हैं और बड़े आयोजन होते हैं। उस पर तो किसी का ध्यान नहीं जाता है और कोई आपत्ति किसी को तो नहीं होती है। वहीं मुसलमान का कोई पर्व हो या फिर शुक्रवार को नमाज पढ़ने की जगह, उसे लोग मुद्दा बना देते है।

AIMIM अध्यक्ष ने आगे कहा कि भारत में लगभग सभी धर्मों के त्योहार सार्वजनिक स्थानों पर मनाए जाते है पर केवल मुसलमानों को निशाना बनाना सही नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि मुसलमान नमाज़ नहीं छोड़ेंगे। आरोप लगाया कि देश में दोहरे मानदंड अपनाए जा रहे हैं।

ओवैसी ने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में कई मुस्लिम विद्वानों और धार्मिक नेताओं ने अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने अल्लामा फजल-ए-हक खैराबादी और अन्य इस्लामिक विद्वानों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया और अपनी जान तक कुर्बान कर दी। ऐसे लोगों की विरासत को भुलाकर आज अज़ान और नमाज़ को मुद्दा बनाया जा रहा है।

हैदराबाद सांसद ने कहा कि देश में कई धार्मिक यात्राओं और जुलूसों के दौरान सड़कें बंद होती हैं, टेंट लगाए जाते हैं और बड़े आयोजन होते हैं, लेकिन उस पर किसी को आपत्ति नहीं होती. वहीं जब शुक्रवार या ईद के दिन कुछ जगहों पर नमाज़ पढ़ी जाती है। तो उसे बड़ा मुद्दा बना दिया जाता है। ओवैसी ने कहा कि भारत में लगभग सभी धर्मों के त्योहार सार्वजनिक स्थानों पर मनाए जाते हैं, इसलिए केवल मुसलमानों को निशाना बनाना सही नहीं है।

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