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Abhyuday Bharat News / Fri, Jun 26, 2026 / Post views : 2
Business Desk – RBI Draft Rules : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड (Government Securities) में निवेश को और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। RBI ने ‘Secondary Market Transactions in Government Securities, 2026’ का ड्राफ्ट मास्टर डायरेक्शन जारी किया है।
इसका उद्देश्य पुराने नियमों को एकीकृत करना, डिजिटल ट्रेडिंग को सरल बनाना और रिटेल निवेशकों की सरकारी बॉन्ड बाजार तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करना है। नए प्रस्ताव के लागू होने के बाद आम निवेशक सीधे RBI के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म Negotiated Dealing System-Order Matching (NDS-OM) के जरिए सुरक्षित तरीके से सरकारी बॉन्ड खरीद और बेच सकेंगे।
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार रिटेल निवेशक अब कई माध्यमों से सेकेंडरी मार्केट में सरकारी बॉन्ड की खरीद-बिक्री कर सकेंगे। इसमें RBI Retail Direct Scheme, बैंकों के Depository Participant (DP) Demat Account और SEBI रजिस्टर्ड डिपॉजिटरी के Stock Broker Connect जैसे विकल्प शामिल हैं। सबसे बड़ी राहत यह है कि जिन निवेशकों का डीमैट अकाउंट NDS-OM के डायरेक्ट मेंबर बैंकों में होगा, वे बिना किसी बिचौलिए के सीधे प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग कर सकेंगे।
RBI ने छोटे निवेशकों को ध्यान में रखते हुए निवेश की न्यूनतम सीमा भी आसान रखी है। प्रस्ताव के मुताबिक सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में 10 हजार रुपए की फेस वैल्यू से निवेश शुरू किया जा सकेगा। इसके बाद हर अतिरिक्त निवेश 10 हजार रुपए के गुणक में किया जाएगा। इससे छोटे निवेशकों के लिए भी सरकारी बॉन्ड बाजार में प्रवेश करना आसान होगा।
ड्राफ्ट नियमों के तहत NDS-OM के डायरेक्ट मेंबर बैंकों को अपने गिल्ट अकाउंट और डीमैट अकाउंट धारकों को NDS-OM Web Module की सुविधा उपलब्ध करानी होगी। इस प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग मुंबई के कार्यदिवसों में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक प्राइस या यील्ड के आधार पर की जा सकेगी।
RBI ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नया प्रावधान भी प्रस्तावित किया है। NDS-OM प्लेटफॉर्म के बाहर यानी Over the Counter (OTC) किए गए सरकारी बॉन्ड सौदों की जानकारी डील फाइनल होने के 15 मिनट के भीतर संबंधित सिस्टम में रिपोर्ट करनी होगी। इससे बाजार में पारदर्शिता और निगरानी दोनों मजबूत होंगी।
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार सरकारी बॉन्ड की खरीद-बिक्री का सेटलमेंट T+1 आधार पर होगा। यानी ट्रेड के अगले कार्यदिवस तक पैसा और बॉन्ड दोनों का ट्रांसफर पूरा हो जाएगा। इससे लेन-देन अधिक सुरक्षित होगा और धोखाधड़ी की संभावना काफी कम हो जाएगी।
RBI का कहना है कि इस ड्राफ्ट मास्टर डायरेक्शन के लागू होने के बाद सरकारी बॉन्ड से जुड़े कई पुराने और जटिल नियम एक ही ढांचे में आ जाएंगे। इससे Advance Trading, बॉन्ड जारी होने से पहले की खरीद-बिक्री और Short Selling से जुड़े प्रावधान भी पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और आसान हो जाएंगे।
नए नियम लागू होने के बाद आम निवेशकों को सरकारी बॉन्ड खरीदने के लिए ज्यादा आसान, सुरक्षित और डिजिटल व्यवस्था मिलेगी. कम निवेश सीमा, सीधे ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच, तेज सेटलमेंट और पारदर्शी प्रक्रिया से सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
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