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: निजी स्कूल बने आर्थिक अपराध का अड्डा, बिलासपुर शहर में चल रही डमी ऐडमिशन का गढ़ यही स्कूल है।

Admin / Thu, Apr 3, 2025 / Post views : 319

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पढ़ने में अटपटा लग सकता है पर यह वर्तमान की सच्चाई, बिलासपुर शहर और पूरे छत्तीसगढ़ में यही हो रहा है। शिक्षा विभाग ने स्वयं यह स्वीकार किया कि 24 जुलाई 2022 के बाद ड्रीमलैंड स्कूल को मान्यता नहीं है। 2022 में शाला ने मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं दिया दो शैक्षणिक सत्र ऐसे ही बीत गए फिर 9 अप्रैल 2024 को स्कूल प्रबंधन ने नवीनीकरण का आवेदन दिया। जिसमें बहुत सी खामी हैं। बिलासपुर शहर में चल रही डमी ऐडमिशन का गढ़ यही स्कूल है।

प्रश्न उठता है दो शैक्षणिक सत्र जब स्कूल की मान्यता नहीं थी तब यहां से जारी किए गए शैक्षणिक प्रमाण पत्र, टीसी की वैधानिक मान्यता क्या है। और इसका खामियाजा निर्दोष छात्र क्यों उठाए। हजारों परिवार के साथ शाला प्रबंधन ने ठगी की स्कूल की मान्यता नहीं थी पर फीस ली यह ठगी ही है। ऐसा ही एक उदाहरण राजधानी रायपुर के सालेम इंग्लिश स्कूल का है। डायोसिस द्वारा संचालित इस स्कूल के खिलाफ लिखित शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर और कई मंचों पर की गई। शिकायतों में कहा गया है कि बगैर प्रक्रिया का पालन किये सालेम स्कूल का नाम परिवर्तन हो गया और उसके पीछे प्राइवेट शब्द लगा दिया। आरटीआई से निकले दस्तावेज में शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कहा सालेम की मान्यता है। प्राइवेट सालेम की नहीं इसी तरह वर्ष 2017 में एक जनहित याचिका उच्च न्यायलय छत्तीसगढ़ में लगाई गई और छत्तीसगढ़ में चल रहे 19 स्कूलों में हो रहे आर्थिक अनियमितता एवं अन्य समस्याओं की चर्चा हुई ये सभी स्कूल अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय द्वारा संचालित है। सभी स्कूलों और डायोसिस की ओर से यह कह दिया गया कि शाला जबलपुर डायोसिस के अंतर्गत चल रही है। जबकि यह बात सत्य नहीं थी और रजिस्ट्रार फॉर्म सोसायटी के जांच मे भी 2 करोड़ 60 लाख की वित्तीय अनियमितता पाई गई किसने की इस संदर्भ में अभी भी निष्कर्ष लंबित है। कुल मिलाकर ऐसा कहा जा सकता है कि चिटफंड कंपनी खोलकर आर्थिक अपराध कर कर जेल जाना निश्चित है, पर स्कूल की आड़ में किए गए आर्थिक अपराध में बचाने की बड़ी गुंजाइश है।

बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी ने ड्रीमलैंड पर 97 लाख की पेनल्टी की यदि यह पेनल्टी उन्हें मिली तो यह रकम कहां जाएगी ....? इसी संदर्भ में जबलपुर कलेक्टर द्वारा की गई कार्यवाही याद आती है। निजी स्कूलों ने नियम विरुद्ध तरीके से फीस बढ़ाईं, किताबें बदल दी, कमीशन लिया तो कलेक्टर जबलपुर ने ऐसे स्कूलों पर भारी भरकम जुर्माना लगाया। प्रबंधन के जिम्मेदार पदाधिकारी को जेल यात्रा कराई और बढ़ी हुई फ़ीस की राशि पालकों को वापस दिलाई। क्या यह हिम्मत छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग की है.....?

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