सिर में अगर बहुत तेज दर्द हो रहा है, रोशनी आंखों में चुभने के साथ ही दर्द को बढ़ा रही है, आसपास का शोर भी बेचैनी पैदा कर रहा है, तो ये सामान्य हेडेक नहीं है। ये इशारे हैं, जो साफ दिखाते हैं कि आपको हो रहा सिरदर्द असल में माइग्रेन है। और इस स्थिति में आपको कुछ विशेष कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है ताकि दर्द और बदतर न हो।
अक्सर जब लोग मेरे पास गंभीर सिरदर्द की परेशानी को लेकर आते हैं, तो उनमें से ज्यादातर को ये मालूम ही नहीं होता कि उनके सिर में हो रहा दर्द सामान्य नहीं बल्कि माइग्रेन है। कॉमन हेडेक होने पर व्यक्ति को आमतौर पर हल्का दर्द और दबाव महसूस होता है, वहीं माइग्रेन के मामले में दर्द कम-ज्यादा होता रहता है, और रोशनी, आसपास के शोर से भी ये बढ़ता हुआ महसूस होता है। इसी वजह से वो जरूरी कदम उठाने की जरूरत पड़ती है, जो इस पेन को कम करने में मदद कर सकें, नहीं तो रोजमर्रा के काम करना भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
सिरदर्द क्या है:
सामान्य शब्दों में समझा जाए तो Headache सिर में उठने वाला किसी भी प्रकार का दर्द है। कई बार ये गर्दन में भी महसूस होता है। ये हल्का या फिर मध्यम तीव्रता का हो सकता है। इसके सामान्य कारण- आंखों पर दबाव, डीहाइड्रेशन और छोटे-मोटे इंफेक्शन हो सकते हैं। ज्यादातर मामलों में इसके हल्के दर्द और दबाव के बावजूद व्यक्ति के सामान्य जीवन पर कोई असर नहीं होता है।
माइग्रेन क्या है:
ये एक न्यूरोलॉजिकल कंडिशन है। इसका दर्द गहरी तीव्रता का होता है। ये दर्द लहर जैसा कम-ज्यादा होता महसूस होता है और उसके साथ इससे जुड़े कई अन्य लक्षण भी दिखाई देते हैं। इस ब्रेन डिसऑर्डर से जन्मा दर्द सिर के किसी एक हिस्से पर फोकस्ड हो सकता है, साथ ही रोशनी, साउंड और किसी भी प्रकार का मूवमेंट इसे और बढ़ा सकता है। माइग्रेन पेन कई घंटों से लेकर दिनों तक बरकरार रह सकता है, जिससे व्यक्ति का सामान्य जीवन भी प्रभावित हो जाता है।
लक्षण जो दिखाते हैं सिर में हो रहा दर्द असल में है माइग्रेन
दर्द की लहर उठना, एक हिस्से पर लक्षित
अगर सिर में दर्द की लहर बार-बार उठ रही है, इसकी तीव्रता ज्यादा है, ये एक हिस्से पर लक्षित है और सारे काम छोड़कर लेटना या आराम करना पड़ रहा है, तो ये कॉमन हेडेक नहीं बल्कि माइग्रेन है।
लाइट, साउंड और स्मेल के प्रति संवेदनशील
सामान्य लाइट्स, टीवी की आवाज, आसपास मौजूद अन्य शोर, परफ्यूम जैसी चीजें, जो आमतौर पर प्रभावित नहीं करती हैं, लेकिन सिरदर्द के दौरान इनसे परेशानी महसूस होने लगे, तो ये दिखाता है कि आपको माइग्रेन पेन हो रहा है।
उबकाई आना, या उल्टी होना
तेज सिरदर्द के साथ पेट में गड़बड़ महसूस होना, उबकाई आना या फिर उल्टी होना, दिखाता है कि सिर में हो रहा दर्द माइग्रेन का है।
डार्क स्पॉट्स दिखना, झुनझुनी आना
कई लोगों को माइग्रेन पेन उठने से पहले अचानक से आंखों में चमक आने और डार्क स्पॉट्स या प्रकाश की लकीरे दिखने का अनुभव होता है। इसके साथ ही सिरदर्द शुरू होते ही चेहरे और हाथों में झुनझुनी महसूस होना भी माइग्रेन की ओर इशारा करता है।
सिर में बार-बार तीव्र दर्द उठना
अगर तनाव, नींद में कमी या कुछ खास खाद्य पदार्थ लेने पर आपको सिर में बार-बार तीव्र दर्द उठता है, तो वो कॉमन हेडेक नहीं बल्कि माइग्रेन है।
माइग्रेन का दर्द उठे तो क्या करें
किसी शांत और कम रोशनी वाले कमरे में आराम करें
मोबाइल, लैपटॉप, टीवी स्क्रीन से दूर रहें
तेज आवाज में म्यूजिक न सुनें
किसी भी तरह की तेज गंध वाली चीजों से दूरी बनाएं
डॉक्टर के द्वारा दी गई दर्द निवारक दवा लें, इसका ज्यादा इस्तेमाल न करें नहीं तो सिर का दर्द और गंभीर हो सकता है व इनकी आवृत्ति बढ़ सकती है।
अगर बहुत तीव्र सिरदर्द के साथ कमजोरी महसूस हो, समझने में परेशानी आने लगे, या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी लगने लगे, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। इलाज करवाने में देरी न करें।
माइग्रेन की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए क्या करें और क्या न करें
क्या करें:
रोजाना फिक्स टाइम पर सोएं और जागें
समय पर भोजन करें
पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें
अपने सिरदर्द का ट्रैक रखें और उसकी तारीख, समय, कारण और दवाई की जानकारी नोट करते जाएं। इससे डॉक्टर को बेहतर प्लान बनाने में आसानी होती है।
क्या न करें
बार-बार या ज्यादा पेनकिलर्स न लें
बार-बार सिरदर्द हो तो उसे इग्नोर न करें
स्ट्रेस, लंबे समय तक स्क्रीन देखने, समय पर भोजन न करने, पर्याप्त नींद न लेने से बचें।
माइग्रेन के शुरुआती लक्षण
मूड स्विंग्स
अचानक से थकान महसूस होना
गर्दन में जकड़न महसूस होना
बार-बार उबासी आना
खाने की तीव्र इच्छा उठना
लाइट-साउंड को लेकर संवेदनशीलता बढ़ना।
ध्यान रहे कि शुरुआती लक्षणों को समझकर अगर न्यूरोलॉजिस्ट या हेडेक स्पेशलिस्ट से परामर्श ले लिया जाए, तो माइग्रेन की स्थिति को बिगड़ने से समय रहते बचाया जा सकता है। साथ ही इससे हो सकने वाले दुष्प्रभावों की रोक-थाम में भी मदद मिल सकती है।
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Written by
NAVAL SINGH
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