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छत्तीसगढ़ लेटेस्ट न्यूज़ : डायोसिस के पदाधिकारी सुशासन पर भारी

Abhyuday Bharat News / Sat, Jun 28, 2025 / Post views : 633

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19 जून 2025 की तारीख में रायपुर सिविल लाईन थाने में एक एफआईआर दर्ज हुई

शिकायतकर्ता यशराज सिंह, बीनू बैनेट, बी नागराजू, श्रीमती नीलिमा राबिंस, अजय जॉन है। इसी क्रम में एक नाम शशि बाघे का भी है, जो 70 वर्ष की है और सीडीबीई का वैधानिक अधिकारी है। पुरी एफआईआर छत्तीसगढ़ डायोसिस अपंजीकृत और सीडिबीई के अनधिकृत पदाधिकारी नितिन लॉरेंस , रूपिका लॉरेंस, एसके नंदा, अजय उमेश जेम्स, बीके नायक के आसपास है।

सीडीबीई के 19 स्कूल में प्रतिवर्ष करोड़ों की आर्थिक गड़बड़ी है और इसमें से जिस एक स्कूल के खातों की जांच रजिस्टर फर्म सोसायटी ने उच्च न्यायालय में दायर पीआईएल के कारण कराई में एक ही वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ से अधिक का मामला जांच समिति ने पाया। बिलासपुर के बर्जेस स्कूल की जांच कलेक्टर के निर्देश पर हुई जरूर पर जांच प्रतिवेदन अदृश्य है। यहां तक की आरटीआई के तहत शिकायतकर्ता को भी अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। कल्पना करें अन्य 17 स्कूल में जांच हो तो यह शिक्षा माफिया कितना बड़ा होगा। अनदेखा नहीं आरएसएस के एक बड़े नाम लोकेश कावड़िया ने तो अपने पत्रो में छात्रों से वसूली की गई फ़ीस जो पंजीकृत सीडीबीई से अपंजीकृत डायोसिस में ट्रांसफर हुई के से पादरियों के वेतन और अन्य कामों पर लगाए जाने का आरोप लगाया। अन्य काम में पहले नंबर पर धर्मांतरण।

छत्तीसगढ़ में सरकार किसी की हो धर्मांतरण जोरों पर रहता है जब कभी भी भाजपा विपक्ष में होती है और सत्ता में आने के लिए जोर लगाती है तो धर्मांतरण प्रमुख मुद्दा रहता है। बहुत से हिंदू वोट बीजेपी को इसी मुद्दे पर मिलते हैं। छत्तीसगढ़ डायोसिस और सीडीबीई के विरुद्ध इतनी बड़ी एफआईआर के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से मतदाता जिन्होंने भाजपा को धर्मांतरण मुद्दे पर ही वोट दिया स्वयं ठगा पाते हैं। उन्हें लगता है कि वर्तमान मंत्री जो स्वयं को प्रखर हिंदू नेता सिद्ध करते है जब डायोसिस अपंजीकृत और सीडिबीई के फर्जी पदाधिकारीयों की गिरफ्तारी की बात आती है तो गिरफ्तारी होती क्यों नहीं..... इस मामले में दो शिकायतकर्ता दोनों महिला नीलिमा रॉबिंस उम्र 60 साल और शशि बाघे उम्र 70 साल ने तो कहा हमें डर लगता है। आरोपी बेहद ऊंची पकड़ वाले हैं पहले तो एफआईआर नहीं होने दी जब कभी भी शिकायत की मुझे धमकियां दी गई। एफआईआर हो गई तो घर पर पत्थर मारे गए यहां तक की शिकायत दर्ज करा कर लौटने के वक्त रास्ते मे अज्ञात लोगों ने धमकियां दी। 19 जून को एफआईआर दर्ज होने के बाद अभियुक्त गणों की और पहले अग्रिम जमानत याचिका 26 जून को लगी रूपिका लॉरेंस प्राचार्या सालेम स्कूल आरोपी नंबर तीन की याचिका रायपुर सत्र न्यायालय से कड़ी टिप्पणियों के साथ खारिज हुई।

इस प्रकरण विशेष में जांच एजेंसी का कार्य-प्रणाली सीबीआई के समान है। जिन्होंने शिकायत की है उनके बयान लिए गए सबूत भी इन्हीं से मांगे गए और कोई आश्चर्य नहीं कि आरोपी की गिरफ्तारी के बगैर ही चालान भी प्रस्तुत किया जाएगा और गिरफ्तार होना या जमानत कोर्ट के पाले में डाल दी जाएगी। उलट व्यवहार सिविल लाईन थाना बिलासपुर में हुआ नितिन लॉरेंस शिकायत करता है उन्होंने रवि मार्टिन निवासी बिलासपुर, यशराज सिंह, बीनू बनैट निवासी रायपुर के विरुद्ध बिलासपुर पुलिस अधीक्षक को आवेदन किया आवेदन के आधार पर सिविल लाईन थाना बिलासपुर निवासी रवि को रायपुर निवासी यशराज, बीनू को उठाने स्कॉर्पियो गई और लाकर बाद में एफआईआर की भयादोहन की धारा लगाई गई। एफआईआर को सेंसिटिव कर दिया गया। मोबाइल फोन बगैर जप्ती के रख लिए गए जो चालान प्रस्तुत हुआ में भी जप्त नहीं दिखाये गए। आखिर एक ही राज्य में खाकी के रंग में यह अंतर क्यों.....

छत्तीसगढ़ डायोसिस अपंजीकृत सीडीबीई के अवैधानिक पदाधिकारी ऐसी एक्सयूवी में घूमते हैं जिसकी ईएमआई लाखों में है। जमानत पर आपत्ति के समय इसी पदाधिकारी ने स्वयं को अवैधानिक बताया तो यह ईएमआई और गाड़ियों का खर्चा कि आय से होता है..... यदि 420, 467, 468, 471, 34, 409 जैसी धारा में एफआईआर पश्चात गिरफ्तारी नहीं हुई तो माना जाएगा की सुशासन की आंच धीमी पड़ गई और शासन पर दु:शासन (दुर्योधन का भाई) हावी है।

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