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: छत्तीसगढ़ : स्कूल शिक्षा विभाग में प्राचार्य पदोन्नति में लगा ग्रहण..??, प्रदेश में 3500 से अधिक प्राचार्य के पद रिक्त, लेकिन पदोन्नति नियमों के मकड़जाल में उलझ रही हैं प्राचार्य पदोन्नति..??

Admin / Tue, Apr 15, 2025 / Post views : 208

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छत्तीसगढ़ : स्कूल शिक्षा विभाग में प्राचार्य पदोन्नति में लगा ग्रहण..??

शासन के प्राचार्य पदोन्नति के नियमों को बी.एड. योग्यताधारी नियमित व्याख्याता, नॉन बी.एड. मिडिल स्कूल प्रधान पाठक एवं बी.एड. योग्यताधारी व्याख्याता एल.बी. संवर्ग के लोगों के द्वारा किया जा रहा चैलेंज..

प्रदेश में 3500 से अधिक प्राचार्य के पद रिक्त, लेकिन पदोन्नति नियमों के मकड़जाल में उलझ रही हैं प्राचार्य पदोन्नति..??

  • प्राचार्य पदोन्नति के मामले को लेकर माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर के आने वाले फ़ैसले पर सबकी निगाहें टिकी..

रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग में प्राचार्य पदोन्नति का मामला लगातार उलझता नज़र आ रहा हैं

नियमों के मकड़जाल में उलझी प्राचार्य पदोन्नति की प्रक्रिया पिछले 12 वर्षों से अपने आप में  एक अनोखी अनसुलझी पहेली बनी हुई है|

पिछले 12 वर्षों की बात करें तो छत्तीसगढ़ के लगभग हर शासकीय विभागों में पदोन्नति हुई हैं किन्तु स्कूल शिक्षा विभाग में प्राचार्य पदोन्नति का मामला आज तक सुलझाया नहीं जा सका हैं।

बताया जाता हैं कि कभी न्यायालयीन कारणों से तो कभी नियमों का हवाला देकर प्राचार्य पदोन्नति का मामला आज तक लंबित हैं।

ऐसा बताया जा रहा हैं कि प्रदेश में प्राचार्य पदोन्नति की अबूझ प्रक्रिया जारी है, जो शायद चिर-अनंत काल तक जारी रहने वाली है। 

बताया जाता हैं कि प्रदेश में 3500 से अधिक शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में पूर्णकालिक प्राचार्य पदस्थ नहीं हैं, इन स्कूलों में व्यवस्था अंतर्गत संस्था के नियमित व्याख्याता एवं व्याख्याता एल.बी. को प्रभारी प्राचार्य का दायित्व सौंपा गया हैं। पूर्णकालिक प्राचार्य विहीन इन शासकीय हाई स्कूल तथा हायर सेकेण्डरी स्कूलों में कार्यरत इन नियमित व्याख्याता तथा व्याख्याता एल.बी. को अपने विषय आधारित अध्यापन कार्य के साथ-साथ शाला संचालन का कार्य लिया जा रहा हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग की इन स्थितियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता हैं कि

जैसे कोई बिना इंजन के रेल चल रही हो , वैसे ही छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में बिना इंजन रूपी पूर्णकालिक प्राचार्य के स्कूल रूपी रेलगाड़ी चल रही है | 

स्कूल शिक्षा विभाग में लगभग 3500 से अधिक शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में पूर्णकालिक प्राचार्य के पद रिक्त हैं।

टी संवर्ग में वर्ष 2013 एवं ई संवर्ग  में 2016 के बाद से प्राचार्य पद पर पदोन्नति नहीं हुई हैं।

छत्तीसगढ़ प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में विगत 12 वर्षो से 3500 से अधिक शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में प्राचार्य के रिक्त पदों पर पात्रता रखने वाले नियमित व्याख्याता तथा प्रधान पाठक माध्यमिक शाला (स्नातकोत्तर प्रशिक्षित) की प्राचार्य पद पर पदोन्नति नहीं हुई हैं। वहीं अब प्राचार्य पद की कतार में 1 जुलाई 2018 को स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन हो चुके व्याख्याता एल.बी. संवर्ग के लोग भी सम्मिलित हो चुके है।

बताया जाता हैं कि स्कूल शिक्षा विभाग के भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2019 में प्रावधानित नियमों के अनुसार व्याख्याता एल.बी. संवर्ग का भी संविलियन होने की तिथि से 5 वर्ष की अवधि पूर्ण होने के बाद 1 जुलाई 2024 के बाद प्राचार्य पद पर निर्धारित प्रतिशत अनुसार पदोन्नति दी जानी हैं।

वहीं सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले 12 वर्षों से प्राचार्य पद पर पदोन्नति किये जाने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय छतीसगढ़ के द्वारा प्रतिवर्ष व्याख्याता तथा प्रधान पाठक माध्यमिक शाला (स्नातकोत्तर प्रशिक्षित) से CR, गोपनीय चरित्रावली,  कार्य निष्पादन प्रपत्र एवं अचल सम्पत्ति की जानकारी मंगाई जाती है| 

जिसे प्रतिवर्ष सम्बंधित व्याख्याता तथा प्रधान पाठक माध्यमिक शाला (स्नातकोत्तर प्रशिक्षित) के द्वारा अपने अपने जिलों में संस्था प्रमुखों के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में जमा किया जाता है जिसे संकलित कर सभी DEO द्वारा संभागीय सयुंक्त शिक्षा संचालक एवं संचालक लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ में जमा किया जाता है | 

शासन के नियमानुसार अन्य विभागों की तरह प्रतिवर्ष कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची जारी कर रिक्त पदों पर पदोन्नति दिया जाना चाहिए, किन्तु संभवतः प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग में प्राचार्य पदोन्नति नहीं किया गया है।

बताया जाता हैं कि दो माह पूर्व लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ के द्वारा प्राचार्य पदोन्नति की प्रक्रिया जारी होना बताया जा रहा था, जिसे पूर्ण कर सम्भवत: मई- जून 2025 में नये शिक्षा सत्र के प्रारम्भ होने के पूर्व प्राचार्य पद पर पदोन्नति आदेश जारी होने की बात कहीं जा रही थी।

 किन्तु प्राचार्य पदोन्नति के नियमों को लेकर तथा प्राचार्य पदोन्नति के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता में बी.एड.की अनिवार्यता, नॉन बी.एड. मिडिल स्कूल प्रधान पाठकों को प्राचार्य पदोन्नति दिए जाने सहित अन्य मुद्दों को लेकर कुछ लोगों के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर में याचिकाएं दायर किए जाने से 

प्राचार्य पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित हो गई हैं।

शिक्षा के गलियारों में ऐसी चर्चा जोर पकड़ रही हैं कि प्राचार्य पदोन्नति नहीं होने देने के लिए सोची समझी योजना के तहत बाधाऐं डाली जा रही हैं। ताकि कुछ माह अथवा एक-दो वर्ष तक प्राचार्य पदोन्नति न होने पाएं। जिससे सैकड़ों की संख्या में नियमित व्याख्याता, मिडिल स्कूल प्रधान पाठक सहित रेगुलर प्राचार्य भी रिटायर्ड होते चले जाएंगे और ऐसी स्थिति में प्राचार्य के रिक्त पदों की संख्या और बढ़ते चले जाएगी।

बताया जाता हैं कि प्रदेश में प्रत्येक माह लगभग 150 से 200 नियमित व्याख्याता एवं मिडिल स्कूल प्रधान पाठक रिटायर्ड हो रहें हैं। इन वरिष्ठ व्याख्याता, वरिष्ठ प्रधान पाठकों के द्वारा लगभग 35-40 वर्ष की सेवाकाल पूर्ण करने के बाद भी प्राचार्य पद पर पदोन्नति नहीं मिल पाई हैं।

बताया जाता हैं कि पिछले 12 वर्षों से प्राचार्य पदोन्नति को लेकर कोई न कोई बाधा आती रही हैं। कभी पदोन्नति नियमों को चुनौती दी जाती हैं तो कभी प्राचार्य पदोन्नति के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता में बी. एड. की अनिवार्यता को लेकर चुनौती दी जाती हैं, तो कभी नॉन बी.एड. मिडिल स्कूल हेड मास्टर संवर्ग/ व्याख्याता द्वारा 20/ 30 वर्ष की सेवा पूर्ण कर लेने के बाद बी.एड. प्रशिक्षित मान्य कर लिए जाने के लिए नियमों को चुनौती दी जाती हैं।

इसी प्रकार व्याख्याता एल.बी. संवर्ग के द्वारा भी प्राचार्य पदोन्नति को लेकर अपने हितों के लिए आवाज़ उठाई जाती रही हैं।

कारण चाहे जो भी रहा हो किन्तु प्रदेश में विगत 12 वर्षों से प्राचार्य पद पर पदोन्नति नहीं हो पा रही हैं, वहीं कुछ सूत्रों ने बताया कि प्राचार्य पदोन्नति को लेकर नियमों की आड़ में कोई बड़ा खेला हो रहा हैं। सूत्रों का यह भी कहना हैं कि कुछ लोगों के द्वारा जानबूझकर प्राचार्य पदोन्नति के नियमों को इस तरह उलझाया जा रहा हैं कि एन-केन कारणों से प्राचार्य पदोन्नति टलती चली जाएं।

जिससे लगभग प्रत्येक माह "टी एवं ई" संवर्ग में 150-200 नियमित वरिष्ठ व्याख्याता, वरिष्ठ प्रधान पाठक रिटायर्ड होते चले जायेंगे। 

शिक्षा जगत के गलियारों में यह चर्चा जोरों पर हैं कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में वर्षों से प्राचार्य पदोन्नति न होना महज इत्तेफ़ाक हैं या फिर कोई गहरी साजिश है..??

क्योंकि प्राचार्य पद को छोड़ कर नीचे पदक्रम के शिक्षक पदों पर एवं प्रधान पाठक, प्राथमिक शाला, माध्यमिक शाला में पदोन्नति दिया गया है| वहीं केवल शिक्षक से व्याख्याता पद पर तथा व्याख्याता / प्रधान पाठक से प्राचार्य पद पर पदोन्नति नहीं किया गया है | बताया जाता है कि प्राचार्य पद प्रशासनिक पद है एवं उपसंचालक / जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर प्राचार्य को ही पदोन्नत किया जाता है |

वहीं शिक्षा जगत के गलियारों में चर्चा है कि वर्षों से स्कूल शिक्षा विभाग के महत्वपूर्ण कार्यालयों में अपनी जड़े जमा कर बैठे मठाधीश लोग नहीं चाहते कि व्याख्याता से प्राचार्य पदोन्नति हो तथा प्राचार्य से उपसंचालक पद पर पदोन्नति हो, जिससे आगे चल कर जिला शिक्षा अधिकारी एवं उप संचालक जैसे प्रशासनिक पदों पर किसी और को कार्य करने का मौका न मिले, जिससे शिक्षा की दलाली कर रहे लोगों की दुकानदारी सतत रूप से चलती रहे | शायद यहीं कारण है कि प्राचार्य पद पर योग्य लोगो को आने से रोका जा रहा है, क्योंकि यदि सैकड़ों की संख्या में पूर्णकालिक प्राचार्य पद पर पदोन्नति होने से योग्य व्याख्याता / प्रधान पाठक लोगों को आगे आकर कार्य करने का अवसर मिलेगा।

छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पदोन्नति होने से स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत राज्य स्तर के प्रमुख कार्यालयों - लोक शिक्षण संचालनालय, समग्र शिक्षा राज्य परियोजना कार्यालय, SCERT, माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड कार्यालय, राज्य ओपन स्कूल कार्यालय, राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण सहित संभागीय शिक्षण कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा,विकास खण्ड शिक्षा अधिकारियों के कार्यालयों सहित शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में वर्षों से काई की तरह जमें लोगों के स्थान पर नए योग्य, ईमानदार लोगों को कार्य करने का अवसर मिल सकेगा। 

बताया जाता है कि पिछले 12 वर्षों से पदोन्नति नहीं होने से सैकड़ों "टी" एवं "ई" संवर्ग के व्याख्याता तथा प्रधान पाठक सेवानिवृत हो चुके है एवं अनेको व्याख्याता तथा प्रधान पाठक प्राचार्य पदोन्नति का रास्ता देखते - देखते स्वर्ग सिधार गये | लेकिन प्राचार्य पदोन्नति की अबूझ प्रक्रिया जारी है, जो शायद चिर-अनंत काल तक जारी रहने वाली है।

मामले पर चर्चा है कि अपनी पदोन्नति को लेकर अनेकों बार स्कूल शिक्षा विभाग के "टी" एवं "ई" संवर्ग के व्याख्याता तथा प्रधान पाठकों ने मुख्यमंत्री से लेकर तत्कालीन स्कूल शिक्षा मंत्री , स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव, संचालक लोक शिक्षण संचालनालय तथा विभागीय उच्चाधिकारियों से मुलाकात कर अनेकों बार ज्ञापन सौंप कर प्राचार्य पदोन्नति के लिए मांग की, किंतु सरकार के द्वारा प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के समुचित सुधार के लिए बेहद जरूरी इस प्राचार्य पदोन्नति की मांग को तरजीह नहीं दी गई, नतीजा हर वर्ष सैकड़ों की संख्या में वरिष्ठ व्याख्याता तथा मिडिल स्कूल प्रधान पाठक बिना प्राचार्य पदोन्नति के सेवानिवृत होते चले गए, अनेकों व्याख्याता तथा प्रधान पाठक प्राचार्य बनने का सपना लिए स्वर्ग सिधार गए। नतीजा प्रदेश के सैकड़ों शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल प्राचार्य विहीन रह गए , जहां वर्तमान में   प्रभारी के भरोसे काम चलाया जा रहा हैं।

 स्कूल शिक्षा विभाग में विगत 12 वर्षो से प्राचार्य पदोन्नति नहीं होने के कारण 3500 से अधिक शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल प्राचार्य विहीन हैं।

प्रदेश के 3500 से अधिक स्कूलों में पूर्णकालिक प्राचार्य के नहीं होने से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था तथा शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही हैं।

वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि प्राचार्य पद पर पदोन्नति देने से शासन को कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आयेगा , क्योंकि पदोन्नति प्राप्त करने वाले सभी वरिष्ठ व्याख्याता तथा प्रधान पाठक वर्तमान में प्राचार्य पद का ही वेतन और पे स्केल प्राप्त कर रहें हैं।

सरकार को चाहिए कि  प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में समुचित सुधार के लिए तथा प्राचार्य विहीन समस्त हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में पूर्णकालिक प्राचार्य की पदस्थापना के लिए प्राचार्य पदोन्नति की सम्पूर्ण विभागीय कार्यवाही को शीघ्र पूर्ण कर प्राचार्य पदोन्नति का आदेश जारी किया जाना चाहिए ताकि प्राचार्य विहीन स्कूलों को पूर्णकालिक प्राचार्य मिल सकें।

वहीं सूत्रों का यह भी कहना हैं कि यदि प्राचार्य पदोन्नति के नियमों में कहीं सुधार करना आवश्यक हो तो, तत्काल नियमों में संशोधन कर राज्य सरकार द्वारा प्राचार्य पदोन्नति के लिए कड़े और स्थायी नियम बनायें जाने चाहिए, साथ ही प्राचार्य पद पर पदोन्नति के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, कार्यानुभव तथा स्पष्ट मानदण्ड निर्धारित होना चाहिए।

प्राचार्य पद पर पदोन्नति के लिए केवल पात्रताधारी लोगों की ही पदोन्नति होनी चाहिए। 

सूत्रों का कहना हैं कि आज प्राचार्य पदोन्नति को लेकर विभिन्न संवर्गों में जो विवाद की स्थिति निर्मित हो रही हैं, उसके पीछे प्राचार्य पदोन्नति के लिए बनाये गए नियम मुख्य कारक हैं।

इन नियमों की वजह से प्राचार्य पद पर पदोन्नति को लेकर नियमित व्याख्याता, मिडिल स्कूल प्रधान पाठक एवं व्याख्याता एल.बी. संवर्ग में गहरा मतभेद हैं। जिससे हर संवर्ग का व्यक्ति अपने- अपने हितों को लेकर प्राचार्य पदोन्नति के नियमों को चुनौती देते नज़र आ रहा हैं। प्रत्येक संवर्ग के लोग केवल अपने संवर्ग के हितों को प्राथमिकता दे रहें हैं।

वहीँ प्राचार्य पदोन्नति से अब तक वंचित रहें लोगों का यह कहना हैं कि शिक्षक हितैषी संगठनों, कर्मचारी यूनियनों को चाहिए कि प्राचार्य पदोन्नति के गंभीर मामले में सभी को एकजुट होकर सर्वमान्य हल निकाला जाएं। जिससे पात्रताधारी लोगों की प्राचार्य पद पर शीघ्र पदोन्नति हो सकें।

जानकर बताते हैं कि ऐसे विवादों से बचने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्राचार्य पदोन्नति हेतु कड़े और स्थायी नियम बनायें जाने चाहिए, तभी बाधारहित ढंग से प्राचार्य पदोन्नति संभव हो पायेगी। 

प्राचार्य पदोन्नति के मामले को लेकर विभिन्न संवर्ग के नियमित व्याख्याता, मिडिल स्कूल प्रधान पाठक, व्याख्याता एल.बी. संवर्ग के लोगों के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर में याचिका दायर की गई हैं।

इन याचिकाओं पर माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर के द्वारा दिए जाने वाले फ़ैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

बहरहाल जब तक प्राचार्य पदोन्नति के लिए माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर का फैसला नहीं आ जाता, तब तक प्राचार्य पदोन्नति का रास्ता बंद ही रहेगा।

राज्य सरकार को चाहिए कि शिक्षा हित में प्राचार्य पदोन्नति के लिए कड़े और स्पष्ट नियम बनाकर शीघ्रता से प्राचार्य पदोन्नति के लिए सभी आवश्यक कार्यवाही पूर्ण कर नये शिक्षा सत्र के प्रारम्भ होने के पूर्व प्राचार्य पदोन्नति का आदेश जारी करते हुए विवादों से बचने के लिए काउंसिलिंग के द्वारा प्राचार्य पद पर पदस्थापना करें।

जिससे प्रदेश के समस्त शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में  प्राचार्य पद पर योग्य लोगों की पदोन्नति होने से प्रदेश की समूची शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ हो सकेगी।

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