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: पैदल पशु ले जा रहें लोगो क़े साथ जबरन गौ तस्करी क़े नाम पर मारपीट, पैसो की उगाही, इस कृत्य में नाबालिक भी शामिल

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मामला सरगांव थाना का है 26 अप्रैल को दोपहर को थाना प्रभारी को फोन में सुचना आई की ग्राम टिकैत - पेण्ड्री में कुछ लोग गौ तस्करी कर रहें है l थाना प्रभारी ने तत्काल मौक़े पर पुलिस टीम रवाना किये, मौक़े पर कुछ ग्रामीण चौपाया जानवर बैल - बछडा हल जोतने वाला जानवर रखे मिले, जहाँ बड़ी संख्या में रंग विशेष का गमंझा से मुंह बांधे युवाओं ने घेर रखा था जो अपने आप को बजरंग दल क़े सदस्य बता रहें थे और गौ तस्करी का झूठा आरोप लगा कर बजरंग दल क़े अभय सिंह ने राम अवतार मेहरा को डंडे से पीटा जिसकी शिकायत राम अवतार मेहरा ने मारपीट की लिखित शिकायत पर सरगांव पुलिस ऍम एल सी कराया है, राम अवतार की छाती पर चोटे आई है, मारपीट जैसे कृत्य में बजरंग दल क़े युवक क़े साथ नाबालिक युवक भी शामिल है, जांच अधिकारी ने बताया कि पशु दल में एक भी गाय नहीं थी। जानवर खूंटी घाट पशु बाजार के लिए ले कर जा रहें थे और पैदल ही ले जा रहे थे। जो लोग पशुओं को ले जा रहे थे उन्हें खिलाने और पिलाने के लिए पर्याप्त सामान भी रखे थे। ऐसे में पशु क्रूरता का कोई मामला नहीं बनता था।

इस पूरे मामले में पशुओं को जिनकी संख्या 18 से अधिक बताई गई को पुलिस ने थाना सरगांव से 45 किलोमीटर दूर एक गौशाला में रखवाया है। मामले में बीएनएस की धारा 106 के तहत अपराध पंजीबद्ध हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे किसान जो बहुत छोटी जमीन की जोत करते हैं और सुखा समय में पशु एकत्र कर क्रय करते हैं। जरूरतमंद किसानों को बिक्री करके अपना पैतृक व्यवसाय कर रहे हैं में भारी दहशत है। उन्हें काम के दौरान हमेशा बजरंग दल वाले उदंड बजरंगी का डर बना रहता है। 

यहां एक बात ध्यान देने वाली है शहर में पशु विक्रेता दुकानदार 1/1 के पिंजरे में कुत्ता, बिल्ली का प्रजनन करा कर उन्हें कई हजार रुपए में बेचता है। पुलिस ने कभी भी इस अपंजीकृत दुकानों के मालिको के खिलाफ बीएनएस 106 के तहत कार्यवाही नहीं की पर खुले में पैदल पशुधन ले जा रहे ग्रामीण इसकी चपेट में आते हैं, और आरोपी बनते हैं।

इन युवकों क़े द्वारा लगातार गौ तस्करी क़े नाम पर सीधे साधे लोगो से झूठा आरोप लगा कर मारपीट करना, धमकाना एवं पैसो की वसूली करना है ये नाबालिक बच्चे स्कूल भले न जाते हो लेकिन इस कृत्य में जरूर जाते हैँ और इन लड़को की भीड़ बढ़ा कर जो नेतृत्व कर्ता युवक बड़े आराम से धमकाने चमकाने का कार्य करते है 

 

सरगांव निवासी ब्रजेश शर्मा क़े नेतृत्व में विगत दिनों अपने नाबालिक लड़को क़े दल बल क़े साथ ग्राम टिकैत पेण्ड्री निवासी एक सतनामी समाज क़े पीड़ित परिवार को दोपहर में 18.20 लड़के घेरे हुए थे और घर पर मौजूद महिला को धमका रहा था की तुम लोग गौ तस्करी का काम करते हो और गौ मांस खाते हो करके झूठा आरोप लगा कर घेरे हुए थे, तुम्हरा पति और बेटा कहा हैँ उसे हम पीटेंगे और अपने साथ लेके जायेंगे कर क़े धमका रहा था और गाली गलौच कर रहें थे, *पीड़ित महिला ने बताया की सरगांव, चंदली, पकरिया, अमोरा, लाटा, बरेला, और आसपास क़े लड़को का ग्रुप बार बार घर घुसकर किसी भी समय आकर धमकाने मारपीट करने का काम करते है, इन लोगो से गावं में दहशत का माहौल बना हुआ है, इस घटना क़े कई चश्मदीद हैँ 

⭕ शहरी क्षेत्रों में बजरंग दल की छवि धार्मिक कार्यक्रम करने वालों की है और ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी अंदडता से पुलिस भी स्वयं को न केवल दबाव महसूस करती है, साथ ही इन्हे सत्ता पक्ष का नजदीकी मानते हुए इसके दबाव में जबरदस्ती कार्यवाही भी करते है l  

पैदल मवेशी ले जा रहें लोग स्थानीय लोग हैँ कम पढ़े लिखें लोग है जो इस व्यवसाय से जुड़े हुए है और मानसून क़े दस्तक क़े पहले वर्षापूर्व तक तीन से चार माह यह कार्य कर आपने परिवार का भरण पोषण करते और बरसात आते ही आपमें खेती बाड़ी क़े कार्य करते है

  ⭕ माना की आज विज्ञान विभिन्न क्षेत्रों में बहुत तरक्की कर लिया हैँ क़ृषि कार्य करने आज एक से बढ़ कर एक क़ृषि यंत्र उपलब्ध हैँ लेकिन पारम्परिक खेती बाड़ी का कार्य पशुधन बैल भैस से करते है बरसात क़े पूर्व किसान आपने खेती किसानी क़े संसाधनों को दुरुस्त करने में लग जाते हैँ नये जानवर जो बैल बछड़ा और भैस का नवा जूना करते हैँ इस काम क़े लिए किसान या तो किसान से मवेशी खरीदी बिक्री करते हैँ या इस व्यवसाय से जुडे लोगोँ से खरीदी करते है या आसपास संचालित मवेशी बाज़ार जाकर खरीदी बिक्री करते हैँ और अपने खेती किसानी का कार्य करते हैँ  

पशुधन- भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा

 

भारतीय अर्थव्यवस्था में पशुधन की अहम भूमिका है। लगभग 20.5 मिलियन लोग अपनी आजीविका के लिए पशुओं पर निर्भर हैं। पशुधन ने छोटे किसान परिवारों की आय में 16% का योगदान दिया, जबकि सभी ग्रामीण परिवारों के लिए यह औसत 14% है। पशुधन दो-तिहाई ग्रामीण समुदायों को आजीविका प्रदान करता है। यह भारत में लगभग 8.8% आबादी को रोजगार भी देता है। भारत में पशुधन संपदा बहुत बड़ी है। पशुधन क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद में 4.11% और कुल कृषि सकल घरेलू उत्पाद में 25.6% का 

 
 

पशुधन को 'चलता-फिरता बैंक' माना जाता है

  क्योंकि आपात स्थितियों में उनका निपटान किया जा सकता है। वे पूंजी के रूप में काम करते हैं और भूमिहीन ग्रामीण श्रमिकों के मामले में कई बार, यह उनकी एकमात्र पूंजीगत संपत्ति होती है। पशुधन एक संसाधन के रूप में काम करता है और संकट की स्थिति में, वे शहरों में नकदी उधारदाताओं जैसे स्थानीय स्रोतों से ऋण प्राप्त करने की गारंटी के रूप में काम करते हैं।  

सांस्कृतिक

  पशुधन मालिकों को सुरक्षा प्रदान करता है तथा इसमें उनका आत्म-सम्मान भी शामिल होता है, विशेष रूप से तब जब वे मूल्यवान पशुओं जैसे वंशावली बैल, कुत्ते, तथा उच्च उपज देने वाले डेयरी पशु/भैंस आदि के मालिक होते हैं।  

किसान के जीवन में पशुधन की भूमिका

पशुधन कृषकों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में पशुपालक मिश्रित खेती प्रणाली को बनाए रखते हैं, यानी फसल और पशुओं का संयोजन, जहाँ एक उद्यम की उपज दूसरे उद्यम का इनपुट बन जाती है, जिससे बाद में परिसंपत्ति दक्षता का एहसास होता है। पशुधन पशुपालकों को पूरी तरह से अलग-अलग तरीकों से सेवा प्रदान करता है।  

रोज़गार

  भारत में बहुत से लोग कम कुशल और अक्षम होने के कारण अपने रोजगार के लिए बागवानी पर निर्भर हैं।* लेकिन खेती मौसमी प्रकृति की होने के कारण साल में अधिकतम 180 दिन ही काम दे सकती है। भूमिहीन और कम भूमि वाले लोग ग्रामीण मौसम के दौरान अपने काम के लिए पशुधन पर निर्भर रहते हैं।  

सामाजिक सुरक्षा

  पशुधन समाज में उनकी स्थिति के संदर्भ में मालिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है। जिन परिवारों के पास पशु हैं, खासकर भूमिहीनों के पास, वे उन परिवारों से बेहतर स्थिति में हैं जिनके पास पशु नहीं हैं। पशुओं का पालन-पोषण भारतीय संस्कृति का एक हिस्सा हो सकता है। पशुओं का उपयोग विभिन्न सामाजिक-धार्मिक कार्यों के लिए किया जाता है। गृह प्रवेश समारोहों के लिए गायों का उपयोग किया जाता है; विभिन्न धार्मिक कार्यों के दौरान बैल और गायों का सम्मान किया जाता है। कई मालिक अपने पशुओं से लगाव रखते हैं।   ⭕ *भारत क़ृषि प्रधान देश है यहां कई प्रकार की खेती की जाति, मैदानी क्षेत्रों में आधुनिक मशीनों से कार्य किया जाता हैँ लेकिन वनाँचल और पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी पारम्परिक रूप से खेती की जाती है*    ⭕ पारम्परिक त्योहारों में पशुधन का विशेष महत्त्व हैँ A. K. Baghel

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