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⭕ शहरी क्षेत्रों में बजरंग दल की छवि धार्मिक कार्यक्रम करने वालों की है और ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी अंदडता से पुलिस भी स्वयं को न केवल दबाव महसूस करती है, साथ ही इन्हे सत्ता पक्ष का नजदीकी मानते हुए इसके दबाव में जबरदस्ती कार्यवाही भी करते है l
भारतीय अर्थव्यवस्था में पशुधन की अहम भूमिका है। लगभग 20.5 मिलियन लोग अपनी आजीविका के लिए पशुओं पर निर्भर हैं। पशुधन ने छोटे किसान परिवारों की आय में 16% का योगदान दिया, जबकि सभी ग्रामीण परिवारों के लिए यह औसत 14% है। पशुधन दो-तिहाई ग्रामीण समुदायों को आजीविका प्रदान करता है। यह भारत में लगभग 8.8% आबादी को रोजगार भी देता है। भारत में पशुधन संपदा बहुत बड़ी है। पशुधन क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद में 4.11% और कुल कृषि सकल घरेलू उत्पाद में 25.6% का
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पशुधन मालिकों को सुरक्षा प्रदान करता है तथा इसमें उनका आत्म-सम्मान भी शामिल होता है, विशेष रूप से तब जब वे मूल्यवान पशुओं जैसे वंशावली बैल, कुत्ते, तथा उच्च उपज देने वाले डेयरी पशु/भैंस आदि के मालिक होते हैं।
पशुधन कृषकों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में पशुपालक मिश्रित खेती प्रणाली को बनाए रखते हैं, यानी फसल और पशुओं का संयोजन, जहाँ एक उद्यम की उपज दूसरे उद्यम का इनपुट बन जाती है, जिससे बाद में परिसंपत्ति दक्षता का एहसास होता है। पशुधन पशुपालकों को पूरी तरह से अलग-अलग तरीकों से सेवा प्रदान करता है।
भारत में बहुत से लोग कम कुशल और अक्षम होने के कारण अपने रोजगार के लिए बागवानी पर निर्भर हैं।* लेकिन खेती मौसमी प्रकृति की होने के कारण साल में अधिकतम 180 दिन ही काम दे सकती है। भूमिहीन और कम भूमि वाले लोग ग्रामीण मौसम के दौरान अपने काम के लिए पशुधन पर निर्भर रहते हैं।
⭕ *भारत क़ृषि प्रधान देश है यहां कई प्रकार की खेती की जाति, मैदानी क्षेत्रों में आधुनिक मशीनों से कार्य किया जाता हैँ लेकिन वनाँचल और पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी पारम्परिक रूप से खेती की जाती है*
⭕ पारम्परिक त्योहारों में पशुधन का विशेष महत्त्व हैँ
A. K. Baghel
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