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: छत्तीसगढ़: स्कूल शिक्षा विभाग के प्राचार्य पदोन्नति का मामला पहुँचा हाईकोर्ट ...प्राचार्य पदोन्नति के मामले को लेकर माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर के 1 मई 2025 को आने वाले फ़ैसले पर सबकी निगाहें टिकी..

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माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर के डिवीज़न बेंच में हुई सुनवाई, 

अब प्राचार्य पदोन्नति के सभी मामलों को एक साथ क्लब कर एक ही बेंच में 1 मई 2025 को होगी सुनवाई..

प्राचार्य पदोन्नति के मामले को लेकर माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर के 1 मई 2025 को आने वाले फ़ैसले पर सबकी निगाहें टिकी.

 

रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के प्राचार्य पदोन्नति का मामला एक बार फिर से हाईकोर्ट में पहुंच गया हैं।

 

बताया जाता हैं कि प्रदेश के

स्कूल शिक्षा विभाग में लगभग 3500 से अधिक शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में पूर्णकालिक प्राचार्य के पद वर्षों से रिक्त हैं।

टी संवर्ग में वर्ष 2013 एवं ई संवर्ग  में 2016 के बाद से प्राचार्य पद पर पदोन्नति नहीं हुई हैं।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार लंबे समय से प्राचार्य पदोन्नति को लेकर नियमित व्याख्याता, मिडिल स्कूल प्रधान पाठक, व्याख्याता एल.बी. संवर्ग के कुछ लोगों के द्वारा प्राचार्य पदोन्नति के नियमों को लेकर माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर में अनेक याचिकायें लगाई गई हैं।

अलग-अलग संवर्ग के लोगों के द्वारा प्राचार्य पदोन्नति को लेकर लगाई गई याचिकाओं में विगत 16 अप्रैल 2025 को माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर की डिवीज़न बेंच में मोशन हियरिंग हुई।

साथ ही प्राचार्य पदोन्नति को लेकर दायर की गई एक इंटरविनर पिटीशन को भी क्लब करके सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान शासन की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता ने माननीय हाईकोर्ट को यह जानकारी दी कि, स्कूल शिक्षा विभाग के भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2019 को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की अन्य बेंचो में भी कई याचिकाएं लंबित हैं। 

शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने माननीय हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि प्राचार्य पदोन्नति के सभी मामलों को एक साथ क्लब करके एक ही बैंच द्वारा सुनवाई की जाएं।

इस पर माननीय चीफ जस्टिस महोदय ने सहमति जताते हुए प्राचार्य पदोन्नति से सम्बंधित सभी लंबित याचिकाओं को एक साथ क्लब करके आगामी 1 मई 2025 को सुनवाई हेतु सूचीबद्ध करने का निर्देश दिए।

वहीँ सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में प्राचार्य पदोन्नति की प्रक्रिया में माननीय हाईकोर्ट द्वारा किसी भी प्रकार का स्टे नहीं हैं।

अर्थात प्राचार्य पदोन्नति की प्रकिया में कोई न्यायिक रोक नहीं लगी हैं।

बताया जाता है कि पिछले 12 वर्षों से स्कूल शिक्षा विभाग के सैकड़ों वरिष्ठ व्याख्याता एवं मिडिल स्कूल प्रधान पाठक प्राचार्य पद पर अपनी पदोन्नति की बाट जोह रहें हैं।

प्राचार्य पदोन्नति नहीं होने से सैकड़ों "टी" एवं "ई" संवर्ग के व्याख्याता तथा प्रधान पाठक सेवानिवृत हो चुके है एवं प्रत्येक माह 150/200 लोग लगातार रिटायर्ड होते जा रहें हैं। अनेको वरिष्ठ व्याख्याता तथा मिडिल स्कूल प्रधान पाठक प्राचार्य पदोन्नति का रास्ता देखते - देखते स्वर्ग सिधार गये, किन्तु पिछले 12 वर्षों से प्राचार्य पद पर पदोन्नति रुकी हुई हैं।

 स्कूल शिक्षा विभाग में विगत 12 वर्षो से प्राचार्य पद पर पदोन्नति नहीं होने के कारण 3500 से अधिक शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल प्राचार्य विहीन हैं।

प्रदेश के 3500 से अधिक स्कूलों में पूर्णकालिक प्राचार्य के नहीं होने से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था तथा शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही हैं।

वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि प्राचार्य पद पर पदोन्नति देने से शासन को कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आयेगा , क्योंकि पदोन्नति प्राप्त करने वाले सभी वरिष्ठ व्याख्याता तथा मिडिल स्कूल प्रधान पाठक वर्तमान में प्राचार्य पद का ही वेतन और पे स्केल प्राप्त कर रहें हैं।

प्राचार्य पद पर पदोन्नति के लिए पूर्ण पात्रता रखने वाले लोगों का कहना हैं कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में समुचित सुधार के लिए तथा प्राचार्य विहीन समस्त हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में पूर्णकालिक प्राचार्य की पदस्थापना के लिए प्राचार्य पदोन्नति की सम्पूर्ण विभागीय कार्यवाही को शीघ्र पूर्ण कर प्राचार्य पदोन्नति का आदेश मई माह में ही जारी कर दिया जाना चाहिए ताकि 16 जून 2025 से नये शिक्षा सत्र के प्रारम्भ होने के पूर्व ही प्राचार्य विहीन स्कूलों को पूर्णकालिक प्राचार्य मिल सकें।

बहरहाल प्राचार्य पदोन्नति की विभिन्न याचिकाओं पर माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर में 1 मई 2025 को सुनवाई होनी हैं।

प्राचार्य पदोन्नति के मामले में माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर के द्वारा दिए जाने वाले फ़ैसले पर शिक्षा जगत से जुड़े हज़ारों लोगों की निगाहें टिकी हैं।

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