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ABN NEWS : वेनेजुएला पर अमेरिका की कार्रवाई के बाद नया डर, ग्रीनलैंड पर कब्जे की आशंका

Abhyuday Bharat News / Sun, Jan 4, 2026 / Post views : 272

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वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ग्रीनलैंड को लेकर चिंता बढ़ गई है। ट्रंप समर्थकों की बयानबाजी और सोशल मीडिया पोस्ट से कब्जे की आशंका जताई जा रही है। डेनमार्क ने कड़ी आपत्ति जताते हुए संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला दिया है। 

वेनेजुएला पर अमेरिका के हमले और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद अब ग्रीनलैंड को लेकर नई चिंताएं सामने आ रही हैं। इस हमले के तुरंत बाद अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने ग्रीनलैंड को लेकर बयान देने शुरू कर दिए। इससे यह डर बढ़ गया है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश कर सकता है। 


वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद एक दक्षिणपंथी पॉडकास्टर केटी मिलर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ग्रीनलैंड का एक नक्शा शेयर किया, जिस पर अमेरिकी झंडा बना हुआ था और नीचे लिखा था- SOON यानी जल्द, केटी मिलर डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी और उनके डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर की पत्नी हैं। इस पोस्ट के बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड में नाराजगी देखने को मिली। 

डेनमार्क ने आपत्ति जताई

डेनमार्क के अमेरिका में राजदूत जेस्पर मोलर सोरेनसन ने इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका और डेनमार्क पुराने और भरोसेमंद सहयोगी हैं. उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए काम करते हैं। उनका कहना था कि अमेरिका की सुरक्षा ग्रीनलैंड और डेनमार्क की सुरक्षा से जुड़ी हुई है।

उन्होंने यह भी बताया कि डेनमार्क ने 2025 में अपना रक्षा बजट बढ़ाकर करीब 13.7 अरब डॉलर कर दिया है, ताकि आर्कटिक और नॉर्थ अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत की जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि डेनमार्क अपनी क्षेत्रीय सीमाओं और संप्रभुता के पूरे सम्मान की उम्मीद करता है। 

ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत की नियुक्ति

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए अमेरिका का विशेष दूत नियुक्त किया है। लैंड्री ने दिसंबर में इस नियुक्ति पर ट्रंप का धन्यवाद करते हुए कहा था कि ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाना उनके लिए सम्मान की बात होगी। उन्होंने वेनेजुएला में मादुरो सरकार को हटाने की अमेरिकी कार्रवाई का भी समर्थन किया और इसे ड्रग्स के खिलाफ अमेरिका की लड़ाई बताया। 

ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही ग्रीनलैंड को लेकर उनके बयान यूरोपीय देशों को चिंता में डालते रहे हैं। ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से बहुत अहम माना जाता है। क्योंकि यहां भविष्य में खनिज संपदा मिलने की बड़ी संभावना है। इसके अलावा यहां अमेरिका का सबसे उत्तरी सैन्य अड्डा पिटुफिक भी है, जहां मार्च में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दौरा किया था। 

ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात कह चुके

डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा है कि वह ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं करते। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अमेरिका को ग्रीनलैंड की बहुत जरूरत है। इन बयानों के बाद डेनमार्क की खुफिया एजेंसी ने अमेरिका को सुरक्षा जोखिम तक बता दिया, जो अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। 

डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्रियों ने साफ कहा है कि किसी भी देश की सीमाएं और उसकी संप्रभुता अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत तय होती हैं, और किसी दूसरे देश को जबरन कब्जा करने का अधिकार नहीं है। ग्रीनलैंड की करीब 57 हजार आबादी में से ज्यादातर लोग डेनमार्क से आजादी चाहते हैं, लेकिन अमेरिका का हिस्सा बनना नहीं चाहते। 


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