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ABN NEWS : देश से ज्यादा समुद्री रास्तों पर कब्जे की कोशिश, ऐसे पूरी दुनिया पर कंट्रोल चाह रहा है अमेरिका

Abhyuday Bharat News / Thu, Jan 8, 2026 / Post views : 228

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वेनेजुएला पर हमला सिर्फ एक देश पर कार्रवाई नहीं, बल्कि अमेरिका की वैश्विक समुद्री वर्चस्व रणनीति का हिस्सा है। ग्रीनलैंड, कैरेबियन, दक्षिण अटलांटिक, लाल सागर, फारस की खाड़ी और बंगाल की खाड़ी के जरिए अमेरिका अहम चोकपॉइंट्स पर पकड़ बनाना चाहता है, जिससे चीन, भारत और BRICS पर रणनीतिक दबाव बढ़ेगा। 

वेनेजुएला पर हमले के बाद दुनिया ने जो देखा, वह सिर्फ एक देश पर कब्जे की कहानी नहीं है। यह अमेरिका की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है. इतिहासकार इसे 19वीं सदी के मोनरो सिद्धांत की वापसी बता रहे हैं, लेकिन इस बार इसका दायरा सिर्फ पश्चिमी गोलार्ध तक सीमित नहीं है। ट्रंप ने अपनी नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी 2025 में साफ कर दिया है कि अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध में अपना प्रभाव बनाए रखेगा। हालांकि यह रणनीति सिर्फ अमेरिकी महाद्वीप तक सीमित नहीं रहेगी। 

अमेरिका दुनियाभर के समुद्री रास्तों पर कंट्रोल पाने की कवायद कर रहा है। वह इस प्लान को कैसे अंजाम देना चाह रहा है,

1. ग्रीनलैंड: आर्कटिक के दरवाजे की चाबी

ट्रंप ने बार-बार कहा है कि हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड चाहिए। यह अब बातचीत का विषय नहीं है। ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के बाद अमेरिका को बैफिन की खाड़ी, हडसन की खाड़ी, लैब्राडोर सी और बैरेंट्स सी पर कंट्रोल मिल जाएगा। 

  1. बैफिन की खाड़ी: कनाडा और ग्रीनलैंड के बीच यह खाड़ी नॉर्थवेस्ट पैसेज का एंट्री पॉइंट है। जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है, जिससे नए शिपिंग रूट्स खुल रहे हैं।

  2. लैब्राडोर सी: यह उत्तरी अटलांटिक का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां से यूरोप और अमेरिका व्यापार गुजरता है।

  3. बैरेंट्स सी: यह समुद्र रूस के करीब है, जहां रूसी उत्तरी बेड़ा तैनात है। यह इलाका ग्रीनलैंड GIUK गैप (Greenland-Iceland-UK) का हिस्सा है, जो NATO के लिए रूसी नौसैनिक गतिविधियों की निगरानी का सेंटर पॉइंट है।

  4. हडसन की खाड़ी: इस पर कंट्रोल होने के बाद अमेरिका को कनाडा के भीतरी इलाके तक पहुंच मिलेगी।

2. कैरेबियन सी: पूरे कंट्रोल की तैयारी

US वेनेजुएला, कोलंबिया, क्यूबा और मेक्सिको की चौतरफा घेराबंदी करना चाह रहा है। अगस्त 2025 से अमेरिका ने कैरेबियन सी में सबसे बड़ी सैन्य तैनाती की है। अमेरिका ने ऑपरेशन सदर्न स्पीयर के तहत 8 युद्धपोत 6 हजार से ज्यादा मरीन सैनिक, B-52 बॉम्बर, F-35 लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। 1962 के क्यूबन मिसाइल क्राइसिस के बाद यह सबसे बड़ी सैन्य तैनाती है। 

कैरेबियन सागर में एक चोकपॉइंट है, जहां से पनामा कनाल तक पहुंचने का रास्ता कंट्रोल होता है, यहां से दक्षिण अमेरिका से उत्तरी अमेरिका तक का समुद्री व्यापार गुजरता है। माना जा रहा है कि अमेरिका अब कैरेबियन में नेवल बेस स्थापित कर सकता है. फ्लोरिडा की खाड़ी से क्यूबा को दबाया जा सकता है।  मेक्सिको की खाड़ी पर पूरा कंट्रोल संभव है। इसके अलावा ट्रंप ने कहा है कि क्यूबा की सरकार खुद-ब-खुद गिर जाएगी, उन्होंने कोलंबिया पर भी कार्रवाई की धमकी दी है। 

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3. दक्षिण अटलांटिक: ब्राजील में उथल-पुथल

वेनेजुएला पर कब्जा करने से अमेरिका को ब्राजील की सीमा तक सीधी पहुंच मिल जाएगी। ब्राजील दक्षिण अटलांटिक में अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के बीच व्यापार मार्गों को नियंत्रित करता है। अमेरिका साउथ अटलांटिक पर कब्जा करके BRICS की कमर तोड़ने की कोशिश करेगा। अगर ब्राजील में राजनीतिक अस्थिरता आती है या अमेरिका समर्थक सरकार बनती है, तो चीन का दक्षिण अमेरिका में प्रभाव खत्म हो जाएगा । अफ्रीका-दक्षिण अमेरिका व्यापार मार्ग अमेरिकी कंट्रोल में आ जाएगा।

4. लाल सागर और अदन की खाड़ी

अमेरिका, यमन को बांटकर अदन की खाड़ी पर कब्जा करना चाहता है।अदन की खाड़ी लाल सागर और अरब सागर को जोड़ती है। यहां से स्वेज कनाल तक पहुंच नियंत्रित होती है। यूरोप-एशिया व्यापार का 12% हिस्सा यहां से गुजरता है। यहां से अफ्रीका के पूर्वी तट तक पहुंच मिलती है। ट्रंप की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटजी में कहा गया है कि अमेरिका के लिए यह सुनिश्चित करना हमेशा जरूरी होगा कि लाल सागर में उसका आवागमन चलता रहे।

अमेरिका यमन के दक्षिणी हिस्से को अलग करके अमेरिका समर्थक सरकार बनाना चाहता है। इससे ईरान समर्थित हूती विद्रोही कमजोर हो जाएंगे. अदन की खाड़ी पर अमेरिका का पूरा कंट्रोल होगा। अमेरिका ने हूतियों के खिलाफ ऑपरेशन बढ़ा दिए हैं। 

5. फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट: ईरान से टकराव

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है। यह फारस की खाड़ी से खुले समुद्र तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है। दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का 25% और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) व्यापार का 20% सालाना इस स्ट्रेट से होकर गुजरता है। हर दिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। यह रोजाना होने वाले ग्लोबल प्रोडक्शन का पांचवां हिस्सा है। ईरान होर्मुज स्ट्रेट के उत्तरी हिस्से को नियंत्रित करता है, जो इसकी सीमा से लगती है। वहीं ओमान और UAE इसे दक्षिणी तरफ नियंत्रित करते हैं। 


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अमेरिका की रणनीति: तख्तापलट और सैन्य दबाव

जून 2025 में अमेरिका ने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के तहत ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया। अमेरिका ने रेड सी में दो वॉरशिप USS Harry S. Truman और USS Carl Vinson तैनात किए हैं। अगर ईरान में तख्तापलट सफल होता है। होर्मुज स्ट्रेट अमेरिकी नियंत्रण में आ जाएगा, फारस की खाड़ी से तेल निर्यात अमेरिका तय करेगा। चीन और भारत को तेल की सप्लाई अमेरिका की मर्जी पर निर्भर होगी। चीन, ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।

6. बंगाल की खाड़ी: बांग्लादेश और म्यांमार के जरिए

बंगाल की खाड़ी भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, श्रीलंका और इंडोनेशिया को जोड़ने वाला एक अहम समुद्री क्षेत्र है। इसी रास्ते से दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच बड़ा व्यापार होता है।  यह खाड़ी मलक्का जलडमरूमध्य तक सीधी पहुंच देती है, जिसे चीन की एनर्जी सप्लाई की लाइफलाइन माना जाता है।  भारत के लिए अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की सुरक्षा भी काफी हद तक बंगाल की खाड़ी में संतुलन पर निर्भर करती है। 

बांग्लादेश में 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद बनी अंतरिम सरकार को अमेरिका के करीब माना जा रहा है। अगर अमेरिका यहां नेवल बेस बनाता है, तो इससे भारत की समुद्री सुरक्षा को सीधा खतरा पैदा हो सकता है। साथ ही चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति कमजोर होगी और बंगाल की खाड़ी में अमेरिकी प्रभाव तेजी से बढ़ेगा।

म्यांमार में मिलिट्री और विद्रोही समूहों के बीच जारी लड़ाई से अमेरिका को फायदा हो सकता है। अगर विद्रोही जीतते हैं और अमेरिका समर्थक सरकार बनती है, तो अंडमान सागर तक अमेरिकी पहुंच होगी और म्यांमार का क्याउकफ्यू पोर्ट खतरे में पड़ जाएगा। इस पोर्ट को चीन ने 2015 में 50 साल के लिए लीज पर लिया था। यहां से चीन को इंडियन ओशन का डायरेक्ट एक्सेस मिलता है।


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