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मध्य प्रदेश न्यूज : भगोरिया के रंग में 'औकात' की जंग, अलीराजपुर में फिर आमने-सामने आए विजयवर्गीय और सिंघार, मेला बना अखाड़ा

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Abhyuday Bharat News / Wed, Mar 4, 2026 / Post views : 203

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मध्य प्रदेश विधानसभा का औकात वाला विवाद अब सड़कों और मेलों तक पहुंच गया है। अलीराजपुर के भगोरिया उत्सव में जब कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आमने-सामने आए, तो उत्सव की मिठास राजनीतिक तल्खी में बदल गई।

अलीराजपुर: टेसू के फूलों की लाली और मांदल की थाप के बीच जिस भगोरिया मेले में भाईचारे और संस्कृति का संगम होता है, वहां सोमवार को प्रदेश की राजनीति के दो बड़े धुरंधर आपस में भिड़ गए। विधानसभा के बजट सत्र से शुरू हुआ औकात वाला विवाद अभी ठंडा नहीं पड़ा है, इसकी बानगी अलीराजपुर में तब दिखी जब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को घेर लिया।

'अपमान करने आए हो या माफी मांगने?'

जैसे ही दोनों नेताओं का सामना हुआ, उमंग सिंघार ने बिना समय गंवाए सीधा हमला बोला। सिंघार ने विजयवर्गीय से पूछा, 'यहां आदिवासियों का अपमान करने आए हैं, उनकी औकात दिखाने आए हैं या अपने बयान पर माफी मांगने?' विजयवर्गीय ने उस वक्त तो संयम बरता और कहा कि वे यहां राजनीति नहीं, बल्कि उत्सव देखने आए हैं, लेकिन यह तल्खी यहीं खत्म नहीं हुई।

माफी पर फंसा पेंच

मंगलवार को यह विवाद और गहरा गया। सिंघार ने साफ कहा कि विजयवर्गीय का भगोरिया आना महज एक दिखावा है। उन्होंने याद दिलाया कि विवादित बयान पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तो सदन में माफी मांग ली थी, लेकिन खुद विजयवर्गीय ने अभी तक खेद नहीं जताया है।


मैं हर साल भगोरिया में आता हूं, यह हमारी आदिवासी संस्कृति का जीवंत उत्सव है। जिस तरह से नेता प्रतिपक्ष बयानबाजी कर रहे हैं, वह उनकी छोटी मानसिकता को दर्शाता है।                                  

कैलाश विजयवर्गीय


क्या है औकात वाला मामला?

यह पूरा विवादके दौरान शुरू हुआ था विधानसभा के बजट सत्र । बिजली खरीद के एक समझौते (अडाणी ग्रुप के साथ करार) को लेकर बहस चल रही थी। सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार 25 सालों में कंपनी को सवा लाख करोड़ रुपये देगी। इस पर विजयवर्गीय ने टिप्पणी की। बहस के दौरान विजयवर्गीय ने सिंघार को 'अपनी औकात में रहने' की बात कह दी। इस पर सिंघार ने पलटवार करते हुए कहा कि 'मेरी औकात 7.5 करोड़ जनता के सवाल पूछने की है।' इस विवाद के चलते सदन की कार्यवाही 7 बार स्थगित करनी पड़ी थी और अंततः मुख्यमंत्री को मोर्चा संभालना पड़ा था।

क्यों नहीं थम रही यह आग?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उमंग सिंघार आदिवासी बेल्ट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए इस मुद्दे को जिंदा रखना चाहते हैं। 'आदिवासी अस्मिता' और 'अपमान' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर वे भाजपा को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, कैलाश विजयवर्गीय की छवि एक बेबाक और कड़क नेता की है, जो आसानी से झुकने के लिए तैयार नहीं हैं।

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