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: प्रदूषण की चपेट में जिंदगी, शराब फैक्ट्री के जहरीली गैस और गंदे पानी से त्रस्त ग्रामीण

Admin / Wed, Jan 1, 2025 / Post views : 223

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ABN EXPRESS NEWS 24x7

बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड के छेरका बांधा ग्राम पंचायत में संचालित वेलकम डिस्टलरी शराब फैक्ट्री स्थानीय लोगों के लिए गंभीर संकट का कारण बन गई है. इस फैक्ट्री से निकलने वाली जहरीली गैस और गंदा पानी न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन पर भी भारी असर डाल रहा है. फैक्ट्री से निकलने वाली दुर्गंध इतनी तीव्र है कि कई किलोमीटर दूर से ही महसूस की जा सकती है. पास के गांवों में लोग कपड़े से मुंह ढककर सांस लेने को मजबूर हैं.

गंदे पानी और जहरीली गैस से बच्चों और फसलों पर असर

गांव की सरपंच शकुन्तला मरावी ने बताया कि शराब फैक्ट्री गांव की लोगों के लिए अभिशाप बन गई है, यहां से निकालने वाली जहरीली गैस और गंदा पानी गांव में ही छोड़ा जाता है, जिससे यहां सभी लोगों का जीना मुहाल हो गया है. बदबू और दुर्गंध के कारण फैक्ट्री के पास स्थित सरकारी स्कूल के बच्चों का हाल भी बुरा है. जहरीली गैस और बदबू से बच्चों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है. वहीं, फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा पानी पास के खेतों में काले तालाब जैसा जमा हो रहा है, जो न केवल मवेशियों के लिए घातक है बल्कि किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है. पानी इतना जहरीला है कि इसे पीने से मवेशियों की मौत तय है.

ग्रामीणों की खामोशी और मजबूरी फैक्ट्री से प्रदूषण के बावजूद ग्रामीण विरोध करने से कतराते हैं. अधिकतर ग्रामीणों की जीविका इसी फैक्ट्री पर निर्भर है. उन्हें डर है कि अगर उन्होंने आवाज उठाई, तो उनकी नौकरी चली जाएगी. इसके अलावा, कंपनी प्रबंधन और स्थानीय राजनीतिक दबाव के कारण भी लोग चुप रहते हैं. हालांकि, कुछ ग्रामीणों ने पहले जिला प्रशासन से शिकायत की थी, जिसके बाद फैक्ट्री पर 12.90 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. लेकिन यह कार्रवाई केवल खानापूर्ति साबित हुई, क्योंकि फैक्ट्री ने अब तक प्रदूषण रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं.

प्रशासन और पर्यावरण विभाग की उदासीनता

जिला प्रशासन और पर्यावरण विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. जिले के कलेक्टर अवनीश शरण ने इस गंभीर समस्या को “सामान्य” करार दिया और फिर जांच कराने की बात कही, जबकि फैक्ट्री पर जुर्माना लगाया जाना इस दावे के विपरीत है. पर्यावरण अधिकारी भी इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आए.

बीमारियों की चपेट में ग्रामीण

ग्रामीण राधेश्याम राठिया ने local18 को बताया कि फैक्ट्री से निकलने वाली जहरीले गैस और गंदे पानी से ग्रामीणों में सिर दर्द, सीने में जलन और अन्य घातक बीमारियां बढ़ रही हैं. बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. फैक्ट्री की लापरवाही से गांव का हर तबका प्रभावित हो रहा है, लेकिन समाधान के नाम पर केवल जुर्माने की खानापूर्ति की जा रही है.

प्रदूषण पर कब लगेगी लगाम?

अब सवाल यह उठता है कि प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन कब तक इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज करेंगे? क्या ग्रामीणों को इसी जहरीले वातावरण में अपनी जिंदगी गुजारनी पड़ेगी या प्रशासन प्रदूषण रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा? फैक्ट्री से हो रहे पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का समाधान निकालना अब वक्त की सबसे बड़ी मांग है.

 

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