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स्पोर्ट्स : बुमराह से मिली हौसला-अफजाई से चोटों से उबरने में मदद मिली श्रेयंका को ...?

Abhyuday Bharat News / Wed, Jan 7, 2026 / Post views : 295

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नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) भारतीय ऑलराउंडर श्रेयंका पाटिल को लगता है कि वह फिर से शुरुआत कर रही हैं क्योंकि लगातार चोट के कारण उन्हें एक साल से भी ज्यादा समय तक क्रिकेट से दूर रहना पड़ा।

एक के बाद एक चोटों ने 23 साल की इस क्रिकेटर को अपने पेशवर करियर के शुरूआती चरण में ही जिंदगी के अहम सबक सिखा दिए।

श्रेयंका को 2024 टी20 विश्व कप के बाद पैर के अगले हिस्से (शिन स्प्लिंट्स) की चोट लगी, फिर कलाई में चोट आई। और जब वह पिछले साल घरेलू मैदान पर होने वाले वनडे विश्व कप से पहले राष्ट्रीय टीम में वापसी को लेकर आश्वस्त थीं, तभी उनके अंगूठे में चोट लग गई।

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मैदान पर वापसी नहीं करने से वह निराश हो गई थीं और चोटों से उबरने की प्रक्रिया के दौरान उन्होंने खुद को कमरे में बंद कर लिया था। परिवार के समर्थन और बेंगलुरु स्थित उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) में जसप्रीत बुमराह सहित भारतीय क्रिकेटरों से हुई बातचीत ने उन्हें यह महसूस कराया कि वह अकेली ही नहीं हैं जो चोटों से जूझ रही हैं।

उसी समय भारत के टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव और श्रेयंका की रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की साथी आशा शोभना और कनिका आहुजा भी सीओई में मौजूद थीं।

महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) से पहले चुनिंदा मीडिया से बात करते हुए श्रेयंका ने चोटों से जूझने के अपने अनुभव साझा किए।

उन्होंने कहा, ‘‘शुरुआत में मुझे लगा चोट कुछ समय में ठीक हो जाएंगी। लेकिन मैं तैयार नहीं थी। फिर मुझे सोचना पड़ा कि इससे बाहर कैसे निकलूं। क्योंकि मुझे पहले कभी ऐसा अनुभव नहीं हुआ था। मुझे समाधान तलाशने पड़े, लोगों से बात करनी पड़ी, अपनी भावनाएं व्यक्त करनी पड़ीं। ’’

श्रेयंका ने कहा, ‘‘मैं आमतौर पर बहुत खुलकर बात करने वाली, खुशमिजाज इंसान हूं, लेकिन उस वक्त मैं किसी से बात नहीं कर पा रही थी। मैं दो-तीन महीने तक खुद को एक कमरे में बंद करके रही। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन बाद में मैंने खुद से पूछा कि यह कब तक करूंगी? फिर मैंने लोगों से बात करना शुरू किया, सिर्फ महिला क्रिकेटरों से ही नहीं बल्कि सीओई में मौजूद पुरुष खिलाड़ियों से भी। ’’

बुमराह जैसे खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट और जिंदगी पर हुई बातचीत ने श्रेयंका को इस कठिन दौर में काफी सुकून दिया। उन्होंने कहा, ‘‘बस क्रिकेट, जिंदगी या किसी भी बात पर बातचीत होती थी। तभी मैंने अपनी चोट के बारे में सोचना कम किया और अपने दिमाग को सकारात्मक विचारों से भरने की कोशिश की। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने वहां कुछ दोस्त बनाए जिनमें ज्यादातर लड़कियां थीं। इनमें बुमराह, स्काई (सूर्यकुमार), रियान और मयंक यादव भी थे। उनसे बात करके मुझे लगा कि मैं अकेली नहीं हूं, सिर्फ मैं ही इतनी परेशानियों का सामना नहीं कर रही हूं। ’’

ऑफ-स्पिनर होने के बावजूद श्रेयंका बुमराह से बात करके उत्साहित थीं जिन्होंने अपने शानदार करियर में कई चोटों का सामना किया है।

उन्होंने बताया, ‘‘जब मुझे पता चला कि बुमराह सीओई आ रहे हैं तो मैं थोड़ी उत्साहित हो गई। मेरे दिमाग में ढेर सारे सवाल थे। मैं उनके पास गई और उन्होंने कहा कि किसी दिन बैठकर बात करते हैं। फिर कुछ दिनों बाद उन्होंने खुद कहा, ‘श्रेयंका, अगर फ्री हो तो बात करते हैं’। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पास दबाव में गेंदबाजी को लेकर कई सवाल थे। वह तेज गेंदबाज हैं, मैं स्पिनर हूं, लेकिन मैं भी ‘डेथ ओवर’ में गेंदबाजी करती हूं। मैं जानना चाहती थी कि यॉर्कर का अभ्यास कैसे करते हैं। उन्होंने मेरे सवालों के बहुत शानदार जवाब दिए। ’’

चोटों से निपटने को लेकर बुमराह की सलाह श्रेयंका के दिल में हमेशा के लिए बस गई। उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने मुझसे कहा कि जो कुछ भी तुम झेल रही हो, वह ठीक है। हर कोई इससे गुजरता है। तुम यह सब बहुत कम उम्र में झेल रही हो। इसे स्वीकार करो, इससे लड़ो मत, बस इसमें बने रहो। यह सलाह बहुत खूबसूरत थी क्योंकि वह खुद भी कई चोटों से गुजर चुके हैं। ’’

श्रेयंका ने पिछले अक्टूबर में कैरेबियन प्रीमियर लीग के जरिए प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी की। बिना किसी परेशानी के पहला मैच खेलने के बाद वह भावुक हो गईं और अपने आंसू नहीं रोक पाईं।

इन चोटों के कारण वह घरेलू मैदान पर भारत की ऐतिहासिक वनडे विश्व कप जीत का हिस्सा नहीं बन सकीं। इस साल के अंत में ब्रिटेन में होने वाले टी20 विश्व कप को लेकर वह आशावादी हैं और आईसीसी ट्रॉफी अपने हाथों में उठाने का सपना देख रही हैं।

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