Wed, 10 Jun 2026
Logo

ब्रेकिंग

बिजली की मांग को लेकर 48 गांवों के 500 ग्रामीणों ने खून से लिखा PM मोदी को पत्र, कहा...

TMC का कांग्रेस में विलय? सोनिया गांधी का ममता को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का ऑफर, अभिषेक बनर्जी को पार्टी महासचिव

जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ने के बाद पीएम मोदी की पहली प्रतिक्रिया आई, बोले- ‘सबसे बड़ी कसौटी…

ईरान का ‘मिशन बदलापुर’: अमेरिका के हमले के बाद पूरे खाड़ी में मचाया कोहराम, कतर से लेकर जॉर्डन तक अमेरिकी बेस पर किया हम

Alpha का धमाकेदार टीजर रिलीज, सबसे अलग किरदार में दिखेगी Alia Bhatt …

बांके बिहारी मंदिर में बड़ा हादसा: जर्जर मकान का छज्जा गिरा, सात श्रद्धालु घायल

एल्विश यादव ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के जवाब में बनाई ‘खरगोश जनता पार्टी’, बोले- बहस नहीं, पेस्ट कंट्रोल जरूरी

मार्क जकरबर्ग का बड़ा धमाकाः Meta भारत में खेलेगा पहला AI Data Center, रिलायंस इंडस्ट्रीज से मिलाया हाथ

चीन ने मरोड़ दी जापान की गर्दन, नहीं मानी अमेरिका की बात, भारत पर भी संकट?

12 साल में मोदी सरकार के 12 बड़े फैसले, जिसने बदल दी देश की राजनीति

सूचना

मध्य प्रदेश न्यूज : सीहोर के खेरी में होली पर 'बर्तन प्रथा' बंद करने का निर्णय, नियम तोड़ने पर 5000 रुपए का लगेगा जुर्माना

Abhyuday Bharat News / Fri, Feb 27, 2026 / Post views : 132

Share:

सीहोर जिले के खेरी में चंद्रवंशी खाती समाज ने बर्तन प्रथा बंद करने का निर्णय लिया है। इस नियम को तोड़ने वाले पर पांच हजार रुपए का जुर्माना लगेगा। बर्तन प्रथा के अंतर्गत लोग होली पर एक-दूसरे को बर्तन देते थे।

Bartan Pratha Closed On Holi

सीहोर: अखिल भारतीय चंद्रवंशी खाती समाज ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा और साहसिक कदम उठाया है। गुरुवार को ग्राम पंचायत खेरी स्थित हनुमान मंदिर में समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि होली के पर्व पर बरसों से चली आ रही 'बर्तन प्रथा' को अब पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। समाज के इस निर्णय का उल्लंघन करने वाले परिवार पर ₹5000 का आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान भी किया गया है

फिजूलखर्ची रोकने के लिए कड़ा फैसला

बैठक में ग्राम खेरी के सरपंच प्रतिनिधि धनपाल सिंह वर्मा गांव के पटेल मेहरबान सिंह वर्मा के नेतृत्व में समाज के वरिष्ठजनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि त्यौहारों के नाम पर बढ़ती फिजूलखर्ची और उपहारों के लेन-देन की प्रतिस्पर्धा से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। 'बर्तन प्रथा' जैसी कुरीतियां समाज में भेदभाव पैदा करती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए समाज ने अब इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

ग्रामीणों ने किया फैसले का स्वागत

वहीं, ग्राम पंचायत खेरी के इस निर्णय की आसपास के क्षेत्रों में भी सराहना हो रही है। ग्रामीणों का मानना है कि इस प्रकार के कड़े निर्णयों से न केवल समाज में समानता आएगी, बल्कि युवाओं को भी फिजूलखर्ची से दूर रहने की प्रेरणा मिलेगी। समाज के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जुर्माने की राशि का उपयोग समाज के सामूहिक कार्यों और विकास में किया जाएगा।

समाज के विकास के लिए पुरानी और बोझिल परंपराओं को त्यागना आवश्यक है। होली खुशियों का त्यौहार है, इसे सादगी और प्रेम से मनाया जाना चाहिए। यह फैसला समाज के हर वर्ग के हित में लिया गया है।

क्या है बर्तन प्रथा

गौरतलब है कि होली के मौके पर यह सालों से चली आ रही प्रथा है। इस प्रथा के अंतर्गत होली पर एक परिवार दूसरे परिवार को बर्तन देते थे और बर्तन लेते थे। इससे परिवार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा था। इसके बाद समाज के लोगों ने इसे बंद करने का फैसला किया है।

Tags :

#breking news

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

जरूरी खबरें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

Related Posts