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उत्तर प्रदेश :- भदोही न्यूज : भदोही में डॉक्टरों ने किया था मृत घोषित, चिता पर जिंदा मिला युवक, सांसें चलती देख परिजनों के होश उड़ गए...

Abhyuday Bharat News / Fri, Mar 27, 2026 / Post views : 173

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भदोही में डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किया गया एक व्यक्ति चिता पर जिंदा मिल गया। अंतिम संस्कार से ठीक पहले उसकी सांसें चलती देख परिजनों के होश उड़ गए। 

Bhadohi News

नवल सिंह , भदोही: भदोही से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने न सिर्फ इलाके बल्कि पूरे जनपद को झकझोर कर रख दिया है। यहां डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किया गया एक व्यक्ति चिता पर जिंदा मिल गया। अंतिम संस्कार से ठीक पहले उसकी सांसें चलती देख परिजनों के होश उड़ गए और घाट पर अफरातफरी मच गई।

घटना औराई कोतवाली क्षेत्र के खेतलपुर के पास 23 मार्च की है। सायर गांव निवासी 40 वर्षीय अनिल वनवासी सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन हालत नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें वाराणसी रेफर कर दिया। परिजन अनिल को वाराणसी के लंका स्थित एक निजी अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान मंगलवार शाम डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।

रोते-बिलखते परिजन शव को लेकर गंगा घाट पहुंचे और अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी। घाट पर चिता सजाई जा रही थी, लकड़ियां लग चुकी थीं और अंतिम विदाई का माहौल था। तभी अचानक एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने सबको स्तब्ध कर दिया—अनिल के हाथ की उंगली में हल्की हरकत हुई। पहले इसे किसी का भ्रम समझा गया, लेकिन जब ध्यान से देखा गया तो उनके सीने में हलचल महसूस हुई। सांसें चलती देख वहां मौजूद लोग दंग रह गए। मातम का माहौल अचानक हड़कंप में बदल गया। परिजनों ने बिना एक पल गंवाए अनिल को चिता से उठाया और सीधे औराई ट्रामा सेंटर लेकर दौड़े।

डॉक्टरों ने क्या कहा?

डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया किअनिल जींदा है । और गंभीर चोट के चलते गहरी बेहोशी में चले गए थे। फिलहाल उनका इलाज जारी है और हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। घटना के बाद परिजनों में भारी आक्रोश है। अनिल की पत्नी मालती ने वाराणसी के निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना पूरी जांच किए ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। वहीं, पीड़ित की बहन कमला वनवासी का कहना है कि अगर समय रहते हरकत न दिखती, तो उनका भाई जिंदा ही जला दिया जाता।


इलाज जारी

गांव के प्रधान राजीव जायसवाल ने भी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। एक तरफ यह घटना चिकित्सा व्यवस्था की संभावित लापरवाही को उजागर करती है, तो दूसरी तरफ जीवन और मृत्यु के बीच की उस पतली रेखा को भी दिखाती है, जहां एक पल की चूक सब कुछ बदल सकती है। फिलहाल अनिल जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं और पूरा गांव उनके स्वस्थ होने की दुआ कर रहा है।

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