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देश दुनिया की खबर : अब आप भी देख पाएंगे गलवान के वीर सैनिकों का शौर्य, पर्यटकों के लिए खुला मेमोरियल, रक्षा मंत्री ने किया उद्घाटन

Abhyuday Bharat News / Sun, Dec 7, 2025 / Post views : 212

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अब आप भी देख पाएंगे गलवान के वीर सैनिकों का शौर्य, पर्यटकों के लिए खुला मेमोरियल, रक्षा मंत्री ने किया उद्घाटन

गलवान में भारत के लिए बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए मेमोरियल बनाया गया है। इसका उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया

नई दिल्ली: गलवान घाटी में 15 जून 2020 की रात शहीद हुए 20 सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए बना गलवान मेमोरियल का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उद्घाटन किया। एलएसी पर भारत चीन सैनिकों के बीच गलवान में हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत के 20 सैनिकों ने देश की रक्षा करते हुए शहादत दी। उनके बलिदान को याद करते हुए लद्दाख में गलवान वॉर मेमोरियल बनाया गया है।

गलवान के शहीदों को याद करने के लिए गलवान मेमोरियल बनाया गया है

यह मेमोरियल दुर्बुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (DS-DBO) रोड पर है। ये किलोमीटर KM-120 पोस्ट के पास है। यह इलाका दुनिया के सबसे कठिन सैन्य तैनाती क्षेत्रों में से एक माना जाता है। जहां तापमान शून्य से नीचे रहता है, ऑक्सीजन की कमी रहती है। मेमोरियल को लाल और काले ग्रेनाइट पत्थरों से बनाया गया है, जो बलिदान और वीरता के प्रतीक हैं। इसका डिजाइन त्रिशूल और डमरू के आकार का है। इसके बीच में त्रिकोणीय संरचना है जो ऊर्जा और पहाड़ों का प्रतीक है।

मेमोरियल के चारों तरफ कांस्य की मूर्तियां

मेमोरियल के पास अमर ज्योति और राष्ट्रीय ध्वज भी लगाया गया है। स्मारक के चारों ओर 20 कांस्य की मूर्तियां लगाई गई हैं, जो गलवान में शहीद हुए सैनिकों का प्रतीक हैं। यहां एक संग्रहालय और डिजिटल गैलरी भी बनाई गई है। इसमें गलवान की झड़प, लद्दाख का सैन्य इतिहास और वीरता की कहानियां दिखाई गई हैं।

वीरता को याद करने बनाया मेमोरियल

यह मेमोरियल ‘भारत रणभूमि दर्शन’ योजना के तहत बनाया गया है। इस योजना का मकसद है कि देश के लोग प्रमुख युद्ध स्थलों पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दे सकें और उनके बलिदान की अहमियत समझ सकें। गलवान में हुई खूनी झड़प के बाद यहां वीरगति प्राप्त सैनिकों को श्रद्धांजलि देने और उनकी वीरता को याद रखने के लिए मेमोरियल बनाया गया था, इसे ही अब रिनोवेट किया गया है। इस जगह से सिविल आबादी करीब 100 किलोमीटर दूर है। यहां आखिरी गांव श्योक गांव है। यहां से लेकर गलवान तक रास्ते में टूरिस्टों के रहने और खाने का इंतजाम किया गया है।

यहीं पर गलवान वॉर मेमोरियल

अभी KM-23 तक ही पर्यटकों को जाने की इजाजत थी, पर अब पर्यटक गलवान वॉर मेमोरियल तक जा सकते हैं। । यहां जगहों के नाम दूरी के हिसाब से रखे गए हैं। दुर्बुक को 0 किलोमीटर कहा जाता है। दुर्बुक से 23 किलोमीटर के आगे का पॉइंट किलोमीटर-23 है और 120 किलोमीटर आगे जाकर जो पॉइंट है उसे किलोमीटर-120 कहते हैं, और यही पर गलवान वॉर मेमोरियल है। किलोमीटर-23 में श्योक रिवर पर ब्रिज है और कैफे है।

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