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धर्म : रावण वध से पहले भगवान राम की अनोखी भक्ति, मां दुर्गा को चढ़ा दी थी अपनी आंख ?

Abhyuday Bharat News / Tue, Mar 10, 2026 / Post views : 191

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बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व विजयदशमी के पीछे की गाथा केवल रावण वध तक सीमित नहीं है। लंकापति रावण को परास्त करने से पूर्व भगवान श्री राम ने मां दुर्गा की शक्ति पूजा की थी। यह वह समय था जब मर्यादा पुरुषोत्तम ने देवी को प्रसन्न करने के लिए अकाल बोधन किया था। क्या आप जानते हैं कि इस पूजा के दौरान एक समय ऐसा आया था जब श्री राम ने खुद को समर्पित करने का कठोर निर्णय ले लिया था?

Ramayan katha: रावण वध से पहले भगवान राम की अनोखी भक्ति, मां दुर्गा को चढ़ा दी थी अपनी आंख

हिंदू धर्मग्रंथों में भगवान श्रीराम की भक्ति, त्याग और मर्यादा के कई प्रेरणादायक प्रसंग मिलते हैं। ऐसा ही एक प्रसिद्ध प्रसंग उस समय का है जब भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले मां दुर्गा की आराधना की थी। मान्यता है कि रावण जैसे शक्तिशाली योद्धा को पराजित करने के लिए भगवान राम ने शारदीय नवरात्रि में देवी दुर्गा का अकाल बोधन यानी खास पूजा की थी । कहा जाता है कि पूजा में एक नीलकमल कम पड़ जाने पर भगवान राम ने अपनी आंख तक अर्पित करने का निश्चय कर लिया था।  आइए जानते हैं पौराणिक कथा के बारे में। 

जब जागृत हुईं मां दुर्गा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण भगवान शिव का परम भक्त था और वह महाशक्तिशाली था। उससे युद्ध में विजय प्राप्त करना सामान्य बात नहीं थी। ऐसे में विभीषण ने श्री राम को सलाह दी कि रावण को हराने के लिए मां दुर्गा की पूजा जरूरी है। भगवान राम ने शारदीय नवरात्रि के समय अकाल बोधन यानी असमय देवी को जागृत करके उनकी आराधना शुरू की। यह पूजा लंका विजय के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण थी।

108 नीलकमल और देवी की परीक्षा

पूजा के संकल्प के अनुसार, प्रभु श्री राम को देवी को 108 नीलकमल अर्पित करने थे। पूजा अंतिम चरण में थी, तभी मां दुर्गा ने प्रभु राम की अटूट भक्ति की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। देवी की माया से पूजा स्थल से एक नीलकमल गायब हो गया। जब राम ने देखा कि 108वें नीलकमल की कमी है, तो उन्होंने विचलित होने के बजाय अपना संकल्प पूरा करने का निश्चय किया। उन्हें कमल नयन (कमल जैसी आंखों वाला) कहा जाता था। उन्होंने सोचा कि अपनी एक आंख को ही नीलकमल के रूप में देवी को अर्पित कर देंगे।

जब प्रभु ने उठाया बाण

जैसे ही भगवान राम ने अपनी आंख निकालने के लिए अपना बाण उठाया, तभी मां दुर्गा प्रकट हो गईं। प्रभु राम की इस निस्वार्थ भक्ति और अटूट समर्पण को देखकर देवी बहुत ही प्रसन्न हुईं। उन्होंने प्रभु का हाथ थाम लिया और उन्हें रावण पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया।

रावण की चूक और राम की जीत

एक ओर जहां प्रभु राम निस्वार्थ भाव से शक्ति की साधना कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर रावण भी अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए चंडी पाठ कर रहा था। लेकिन रावण का अहंकार और पूजा के दौरान मंत्रों के उच्चारण में हुई एक छोटी सी गलती उसकी हार का कारण बनी। देवी ने रावण का साथ छोड़कर धर्म के मार्ग पर चल रहे भगवान श्री राम का हाथ थामा और आखिर में रावण का विनाश हुआ।

Tags :

धर्म

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